जिनकी मृत्यु तिथि मालूम नहीं होती उन्हें इस दिन तर्पण के साथ दी जाती है विदाई

 

नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश में पितृ पक्ष की पितृ विसर्जन अमावस्या पर एनसीआर और आसपास के जनपदों से भारी संख्या में श्रद्धालु जनपद हापुड़ की तीर्थनगरी गढ़मुक्तेश्वर पहुंचे। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पितरो के मोक्ष की कामना के लिए गंगा तट पर विधि विधान से स्नान और पूजा पाठ कर आस्था की डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं ने इस दौरान जल में खड़े होकर तर्पण किया और भगवान सूर्य नारायण को अर्ध्य भी दिया।

बता दें, ऐसी मान्यता है कि पीतर विसर्जन अमावस्या को तर्पण के साथ पितरों की विदाई की जाती है। पंडितों के अनुसार, इसे पितृ विसर्जन मोक्ष अमावस्या कहा जाता है, क्योंकि इस दिन उन मृत लोगों के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण कर्म किए जाते हैं जिनकी मृत्यु तिथि मालूम नहीं होती।

अगर किसी कारण से मृत सदस्य का श्राद्ध नहीं कर पाए हैं तो अमावस्या पर श्राद्ध कर्म किए जा सकते हैं। पितृ मोक्ष अमावस्या पर सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के पिंडदान आदि शुभ कर्म करना चाहिए। मान्यता है कि पितृ पक्ष में सभी पित्र देवता धरती पर अपने कुल के घरों में आते हैं और धूप-ध्यान, तर्पण आदि ग्रहण करते हैं। अमावस्या पर सभी पित्र अपने लोक लौट जाते हैं।

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