शामली के किसान कर रहे गन्ने की जैविक खेती, गुड़ खाने के बाद आप भी कहेंगे वाह जी वाह

 

रिपोर्ट- श्रवण सैनी

शामली: उत्तर प्रदेश के शामली जिले में गन्ने की खेती किसानों की पहली पसंद है लेकिन चीनी मिलों में कुछ देरी से भुगतान होने से किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता रहता है वहीं दाम भी मनमाफिक न मिलने की शिकायतें रहती है। किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निरंतर प्रयास कर रहे है।

ऐसे में जैविक खेती के लिए सरकार किसानों को प्रेरित कर रही है। जिले के सिलावर गांव निवासी राहुल शर्मा गन्ने की पैदावार ही करते हैं लेकिन उन्हें भुगतान के लिए चीनी मिलों की ओर नहीं देखना पड़ता है।

चार साल से वह गन्ने की जैविक खेती कर रहे हैं। गन्ने को वह मिल में नहीं डालते, बल्कि उससे गुड़ तैयार करते हैं। जैविक गुड़ साधारण के मुकाबले तीन गुणा अधिक दाम पर बिकता है। किसान राहुल कुल 15 बीघा खेती से ही साल में लाखों की फसल बिक्री कर रहे है।

गन्ने के साथ ही जैविक व गौ अधारित खेती कर वे हल्दी, अरहर, गाजर, मूली समेत विभिन्न सब्जियों की पैदावार भी करते है।

दरअसल आपको बता दे, मामला शामली जिले के गांव सिलावर का है। जहां किसान राहुल जैविक खेती कर अपनी आय को तीन गुना तक बढ़ा चुके है। राहुल शर्मा की उम्र 35 है और 15 बीघा भूमि के किसान हैं।

गन्ना भुगतान की समस्या से वह परेशान रहते थे। साथ ही रसायनों का बेहिसाब इस्तेमाल करना भी उन्हें चुभता था। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से आयोजित गोष्ठी से वह करीब चार साल पहले जैविक खेती के लिए प्रेरित हुए। पहले साल तो पूरा गन्ना मिल में ही डाला।

तीन साल पहले अपने एक परिचित की साझेदारी में कोल्हू लगाया। जैविक गन्ने से गुड़ तैयार किया। लेकिन मांग अधिक नहीं थी तो 50 फीसद से अधिक गन्ना मिल में डालना पड़ा। अगले साल स्थिति बदल गई। पूरे गन्ने का गुड़ बनाया और हाथों हाथ बिकता गया।

राहुल ने बताया कि बाजार में 40 से 50 रुपये किलोग्राम तक गुड़ का भाव होता है, लेकिन उनका गुड़ 125 रुपये किलोग्राम के भाव से बिकता है। मार्केटिंग की जरूरत इसलिए नहीं पड़ी, क्योंकि जिसने भी गुड़ खाया उसने ही प्रचार कर दिया। 60 फीसदी गुड़ की बिक्री तो कोल्हू से ही हो जाती है और देहरादून, दिल्ली, हरियाणा तक भी गुड़ जाता है। एक सीजन में 70 कुंतल से अधिक गुड़ तैयार होता है। आय ठीक-ठाक हो जाती है और तसल्ली ये है कि ऐसा गुड़ लोगों को मुहैया करा रहे हैं जो वास्तव में सेहत के लिए बेहतर है।

राहुल गन्ने की बुवाई ट्रेंच विधि से करते हैं। ऐसे में सरसों के अलावा गोभी, मूली, गाजर, पालक आदि सहफसली के रूप में लगाते हैं। तीन देशी गाय का पालन भी कर रहे हैं। उनके गोबर और मूत्र से खाद व कीटनाशक के रूप में इस्तेमाल करने के लिए खुद ही जीवामृत एवं घनामृत बनाते हैं। गांव के अन्य किसानों को भी जैविक खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

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