जानिए क्या है हाथरस की घटना का पूरा सच, प्रियंका ने मांगा इस्तीफा तो माया ने कही ये बात

 

रिपोर्ट : रितिका आर्या

नई दिल्ली : हाथरस में नाबालिग के साथ हुए बलात्कार की घटना सामने आने के बाद पूरा देश में उबाल में है, क्योंकि जिस कदर उत्तर प्रदेश के हाथरस में बलात्कार की घटना को अंजाम दिया गया, वहीं काफी खून खौला देने वाला था, इस घटना के खबर सामने आने के बाद लोगों ने यह तक कहना शुरू कर दिया है कि आखिर सरकार के कानून का क्या हुआ, जो उन्होंने महिलाओं को महफूज करने के लिए किया। आपको बता दें कि इस घटना को लेकर कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन जारी है, वहीं अब इस मामले पर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश के बाद गृह सचिव भगवान स्वरूप की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी टीम मामले की जांच करेगी।

जो तीन सदस्यीय एसआईटी टीम इस मामले की जांच करेगी उसमें दलित और महिला अधिकारी भी शामिल हैं। इसमें गृह सचिव भगवान स्वरूप, डीआईजी चंद्र प्रकाश और सेनानायक पीएसी आगरा पूनम एसआईटी के सदस्य होंगे। बता दें, सीएम योगी ने पूरे मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में लाने का निर्देश दिया है।

आपको बता दें कि इस मामले में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इस्तीफा मांगा है। प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट कर कहा कि, “रात को 2.30 बजे परिजन गिड़गिड़ाते रहे लेकिन हाथरस की पीड़िता के शरीर को उ.प्र. प्रशासन ने जबरन जला दिया। जब वह जीवित थी तब सरकार ने उसे सुरक्षा नहीं दी। जब उस पर हमला हुआ सरकार ने समय पर इलाज नहीं दिया। पीड़िता की मृत्यु के बाद सरकार ने परिजनों से बेटी के अंतिम संस्कार का..

वहीं अपने दूसरे ट्वीट में प्रियंका ने कहा कि, “अधिकार छीना और मृतका को सम्मान तक नहीं दिया। घोर अमानवीयता। आपने अपराध रोका नहीं बल्कि अपराधियों की तरह व्यवहार किया। अत्याचार रोका नहीं, एक मासूम बच्ची और उसके परिवार पर दुगना अत्याचार किया। @myogiadityanath इस्तीफा दो। आपके शासन में न्याय नहीं, सिर्फ अन्याय का बोलबाला है

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के साथ ही बसपा सुप्रिमों मायावती ने भी इस घटना पर नाराजगी जताई है। मायावती ने ट्वीट कर लिखा, “यूपी पुलिस द्वारा हाथरस की गैंगरेप दलित पीड़िता के शव को उसके परिवार को न सौंपकर उनकी मर्जी के बिना व उनकी गैर-मौजूदगी में ही कल आधी रात को अन्तिम संस्कार कर देना लोगों में काफी संदेह व आक्रोश पैदा करता है। बीएसपी पुलिस के ऐसे गलत रवैये की कड़े शब्दों में निन्दा करती है

मायावती ने आगे लिखा, “अगर माननीय सुप्रीम कोर्ट इस संगीन प्रकरण का स्वयं ही संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करे तो यह बेहतर होगा, वरना इस जघन्य मामले में यूपी सरकार व पुलिस के रवैये से ऐसा कतई नहीं लगता है कि गैंगरेप पीड़िता की मौत के बाद भी उसके परिवार को न्याय व दोषियों को कड़ी सजा मिल पाएगी

गौरतलब है की 14 सितंबर को नाबालिग (19 साल) के साथ वहशी दरिंदो ने पहले तो गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया तो वहीं बाद में बच्ची के साथ मारपीट की गई। दरिंदो ने इस दौरान बच्ची की  रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई, तो वहीं उसकी जीभ को भी काटकर अलग कर दिया। इस घटना के बाद पीड़िता को इलाज के लिए अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया था लेकिन जब उसकी हालत में सुधार नहीं आया तो उसे दिल्‍ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। वहीं अब आखिरकार दिल्ली के सफदरजंग में उसकी मौत हो गई। इस घटना में शामिल चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

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