हाथरस बन गया है "रण का मैदान", अब परिवार ने किया ये बड़ा दावा

 

 रिपोर्ट : स्वाती सिंह

नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित लड़की के साथ हुआ गैंगरेप का मामला अब पेचीदा रुप लेता जा रहा है। सरकार के गैर जिम्मेदाराना रवैये और तानाशाही को देखते हुए अब पूरा देश सड़कों पर है। अब जब मामला सरकार बनाम मीडिया हो गया है और पूरा विपक्ष सरकार और प्रशासन के काले कारनामों को जनता के सामने बेनकाब कर रहा है तब जाकर सरकार की आंखे खुली। आपको बता दें कि अब सरकार ने कुछ आला अधिकारियों को निलंबित करके अपनी जिम्मेदारी निभाई है लेकिन आखिरी में एक ऐसी चीज भी बोल दी जिससे सरकार के इरादों पर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल यूपी सरकार ने साफ कहा कि इस केस से जुड़े हर व्यक्ति का नार्को टेस्ट होगा पीड़िता के परिवार का भी।

अब सरकार और प्रशासन से क्रोधित परिवार वालों ने नार्को टेस्ट कराने से सीधे मना कर दिया। पीड़ित परिवार  का कहना है कि उन्हें टेस्ट नहीं केवल इंसाफ चाहिए। परिवार वालो का कहना है कि उनकी बेटी का अंतिम संस्कार चोरी छुपे किया। न ही उन्हें इस बात की जानकारी दी गई और न ही उनको अपनी बेटी को आखिरी बार देखने दिया गया। इसी बीच अब परिवार तो ये भी आरोप लगा रही है कि जिस शव को पुलिस ने उस रात जलाया था वो उनकी बेटी का शव ही नहीं था। परिवार वालों ने डीएम से लेकर यूपी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता के परिवार वालों का कहना है कि लगातार उन पर अपना बयान बदलने का दबाव बनाया जा रहा। परिवार ने कहा कि हमें हमारे ही घर में नजरबंद कर दिया गया है। न तो हमें अपनी बात रखने का मौका दिया जा रहा है और न ही सरकार ऐसा करने दे रही है।

पीड़िता की मां ने साफ कहा है कि हमें नार्कों टेस्ट नहीं चाहिए बल्कि हमें हमारी बेटी के लिए इंसाफ चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरी बेटी के साथ हुए अन्याय की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में किया जाए। पीड़ित परिवार इस मामले में सिर्फ इंसाफ की मांग कर रहा है। अब सभी नेता से लेकर मीडिया सब हाथरस जाना चाहते हैं और उस बेटी को न्याय दिलाना चाहते हैं। कुछ नेतागिरी के लिए तो कुछ टीआरपी के लिए। विपक्ष और मीडिया के बढ़ते दबाव को देखते हुए अब योगी सरकार ने मिशन डैमेज कंट्रोल शुरु किया है।

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