Hathras केस पर ED का बड़ा दावा- जातीय दंगा फैलाने का था मकसद, मॉरीशस से 100 करोड़ की फंडिंग

 

रिपोर्ट- रितिका आर्या

हाथरस का वो मामला जिसे लेकर देश की राजनीति में बवाल मच गया उसपर अब बड़ा खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है इस कांड के सहारे जातीय दंगा फैलाने की शाजिश रची जा रही थी। ED यानी प्रवर्तन निदेशालय की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के पास मॉरिशस से 50 करोड़ आए थे। जो उन्हें हाथरस कांड के बहाने जातीय दंगा फैलाने के लिए मिली थी। ईडी ने दावा किया है की इस मामले को लेकर पूरी फंडिंग 100 करोड़ से अधिक रुपये की थी। फिलहाल पूरे मामले की जांच पड़ताडल की जा रही है।

हाथरस मामले में चार गिरफ्तार

मेरठ से चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था। इन गिरफ्तार किए गए लोगों को हाथरस में हुए कथित रेप और हत्या कांड मामले के सहारे दंगे की शाजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। कहा जा रहा है इन गिरफ्तार चारों का पीएफआई संगठन से रिश्ता है। इतना ही नहीं पुलिस को इनके पास से भड़काऊ साहित्य भी बरामद हुए हैं।

वेबसाइट के जरिए दंगों की साजिश

पहले ही योगी की युपी पुलिस एक वेबसाइट के जरिए दंगों की साजिश का दावा कर चुकी है। हाथरस मामले में जान गवाने वाली पीड़िता के लिए इंसाफ की मांग के लिए बनाई गई इस वेबसाइट में कई आपत्तिजनक बातें कही गई थी। हाथरस में हिंसा की साजिश के पहलू पर ईडी ने भी केस दर्ज कर लिया है। ईडी की शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि यूपी में जातीय हिंसा भड़काने के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग की गई थी।

क्या था यूपी सरकार का दावा

यूपी सरकार के मुताबिक, प्रदेश में यूपी में जातीय दंगों की साजिश कराकर दुनिया मैं पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की छवि खराब करने के लिए जस्टिस फार हाथरस नाम से रातों रात वेबसाइट तैयार हुई। वेबसाइट में फर्जी आईडी के जरिए हजारों लोग जोड़े गए।

यूपी सरकार का दावा है कि विरोध प्रदर्शन की आड़ में वेबसाइट पर देश और प्रदेश में दंगे कराने और दंगों के बाद बचने का तरीका बताया गया। मदद के बहाने दंगों के लिए फंडिंग की जा रही थी। फंडिंग की बदौलत अफवाहें फैलाने के लिए सोशल मीडिया के दुरूपयोग के भी सुराग मिले हैं। जांच एजेंसियों के हाथ वेबसाइट की डिटेल्स और पुख्ता जानकारी लगी है।

यूपी सरकार के मुताबिक, वेबसाइट में चेहरे पर मास्क लगाकर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को विरोध प्रदर्शन की आड़ में निशाना बनाने की रणनीति बताई गई। बहुसंख्यकों में फूट डालने और प्रदेश में नफरत का बीज बोने के लिए तरह-तरह की तरकीबें बताई गई। वेबसाइट पर बेहद आपत्तिजनक कंटेंट मिले।

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