चुनाव के दौरान बसपा सुप्रीमो ने वापस लिया था केस, अब गंवाने पड़े अपने 7 विधायक

 

नई दिल्ली : बिहार विधानसभा चुनाव के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के भी कुछ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने है। एक तरफ जहां बिहार में अभी आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। वहीं म.प्र. में विधायकों के खरीद फरोख्त के आरोप और यूपी में सेंध मारी चल रहा है। गौरतलब है कि यूपी की प्रमुख पार्टी सपा ने सेंधमारी करते हुए बसपा के सात विधायकों को अपने पाले में कर लिया।

आपको बता दें कि सपा के इस रवैये से नाराज बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि ''इस बार लोकसभा चुनाव में एनडीए को सत्ता में आने से रोकने के लिए हमारी पार्टी ने सपा सरकार में मेरी हत्या करने के षड्यंत्र की घटना को भुलाते हुए देश में संकीर्ण ताकतों को कमजोर करने के लिए सपा के साथ गठबंधन करके लोकसभा चुनाव लड़ा था। सपा के मुखिया गठबंधन होने के पहले दिन से ही एससी मिश्रा जी को ये कहते रहे कि अब तो गठबंधन हो गया है तो बहनजी को 2 जून के मामले को भुला कर केस वापस ले लेना चाहिए, चुनाव के दौरान ​केस वापस लेना पड़ा।''

उन्होंने कहा कि, ''चुनाव का नतीजा आने के बाद इनका जो रवैया हमारी पार्टी ने देखा है, उससे हमें ये ही लगा कि केस को वापस लेकर बहुत बड़ी गलती करी और इनके साथ गठबंधन नहीं करना चाहिए था।''

मायावती ने कहा कि, ''इनका एक और दलित विरोधी चेहरा हमें कल राज्यसभा के पर्चों के जांच के दौरान देखने को मिला। जिसमें सफल न होने पर ये 'खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे' की तरह पार्टी जबरदस्ती बीएसपी पर बीजेपी के साथ सांठगांठ करके चुनाव लड़ने का गलत आरोप लगा रही है।''

निलंबित किये गए बागी 7 विधायकों के नाम

बीएसपी ने असलम राइनी ( भिनगा-श्रावस्ती), असलम अली चौधरी (ढोलाना-हापुड़), मुजतबा सिद्दीकी (प्रतापपुर-इलाहाबाद), हाकिम लाल बिंद (हांडिया-प्रयागराज), हरगोविंद भार्गव (सिधौली-सीतापुर), सुषमा पटेल (मुंगरा बादशाहपुर) और वंदना सिंह-( सगड़ी-आजमगढ़) को निलंबित कर दिया है। आपको बता दें कि बसपा से निष्कासित होने के बाद विधायक अपनी अगली रणनीति बनाने में जुटे हैं।

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