कभी नक्सलियों का गढ़ रहे पलामू की अब बदल रही है किस्मत, जानकर आप भी चौंक जाएंगे

 

रिपोर्ट : स्वाती सिंह

नई दिल्ली : झारखंड में कानून व्यवस्था ने अब नक्सल शब्द का मतलब ही बदल दिया है, जिससे अब झारखंड का विकास होता जा रहा है। गौरतलब है कि नक्सलियों का प्रभाव अब झारखंड में कम होता जा रहा है और अंत में ये खत्म भी हो जाएगा। आपको बता दें कि नक्सलियों और नक्सल गतिविधियों  पर नकेल कसने के बाद अब झारखंड सरकार राज्यों में नक्सल प्रभावित इलाकों को पूरी तरह से बदलने की तैयारी कर रही है। जिससे अब इन नक्सल प्रभावित इलाकों का कायाकल्प होगा और ये झारखंड के लिए नए आकर्षण का केद्र बनेंगे। इन्ही में से एक है झारखंड का पलामू जिला। जहां अब पलामू का कायकल्प होने जा रहा है। आपको बता दें कि कभी नक्सलियो का गढ़ रहा पलामू अब सेब के उत्पादन का बड़ा क्षेत्र बनने जा राह है। जिससे अब नक्सल प्रभावित झारखंड के पलामू जिले की पहचान अब सेब व मोती उत्पादक क्षेत्र के रूप में होगी।

आपको बता दें कि झारखंड सरकार ने पलामू को बदलने की मुहिम शुरु कर दी है। बनाए गए प्लान के मुताबिक पलामू में सेब और मोती से लेकर अब स्ट्राबेरी, ब्रोकली, बेबी कार्न, शिमला मिर्च व मशरूम की खेती भी होगी। शुरुआती चरण में पलामू के मेदिनीनगर सदर प्रखंड के गणने, लेस्लीगंज प्रखंड के बसौरा, चैनपुर प्रखंड के शिवपुर व विश्रामपुर प्रखंड के सिगसिगी गांव का चयन इस बाबत किया गया है। यहां पर सबसे पहले इनकी शुरुआत की जाएगी।

जानकारी की माने तो इन गांवों की 74 एकड़ भूमि में सेब व मोती के अलावा संबंधित सब्जियों की खेती का लक्ष्य रखा गया है। इतने बड़े स्तर पर अब यहां खेती की जाएगी। इन फलों और सब्जियों को झारखंड से बाहर बेचा जाएगा। सरकार ने ये प्लान आम आदमी से लेकर राज्य तक के विकास के लिए बनाया है। अब जैसे जैसे इतने बड़े स्तर पर ये खेती की जाएगी वैसे वैसे लोगों को राजगार मिलेगा और वो अपनी जीविका चलाने में सक्षम होंगे।

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