आखिरकार देश के इस लाल को मिल गई तिरंगे में लिपटी अंतिम विदाई, फिर भी इसांफ का इंतजार...

 

रिपोर्ट : स्वाती सिंह

नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर में जवान अपनी जान की बाजी लगाकर देश की जनता की रक्षा कर रहे हैं। आए दिन आतंकी कश्मीर घाटी में अशान्ति फैलाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं जिसका जवाब भारतीय सेना दे रही है। इन आतंकी साजिश के बीच न जाने कितने जवान देश के नाम अपनी पूरी जिंदगी कर जा रहे हैं। आपको बता दें कि हर रोज सुरक्षाबल कहीं आतंकियों तो कही पाकिस्तान की तरफ से की जा रही सीजफायर के उल्लंघन का करारा जवाब देते हुए अपनी जान की आहूती दे रहें हैं। अब एक ऐसे ही देश के लाल को अंतिम विदाई दी गई जो जम्मू-कश्मीर में शहीद हो गया था। दरअसल इस अंतिम संस्कार को सैन्य सम्मान के साथ करने न करने पर असमंजस बना हुआ था लेकिन परिवार वालों के चलते आखिरकार उनके बेटे को सम्मान के साथ अंतिम विदाई मिल गई। आखिरकार सैन्य सम्मान के साथ रक्षित को अंतिम विदाई नसीब हो गई।

दरअसल कश्मीर के उड़ी सेक्टर में संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से मारे गए सेना के जवान रक्षित चौधरी की मौत हो गई थी। रक्षित की मौत को आत्महत्या बताते हुए सेना ने उसके शव को बिना सैन्य सम्मान के उसके घर शास्त्री नगर पहुंचा दिया था। इससे परिजन उसके शव को लेकर सतवारी चौक पर धरने पर बैठ गए थे।परिवार का कहना था कि उनके बेटे को पूरे सैन्य सम्मान के साथ आखिरी विदाई दी जाए और अपनी इसी मांग को लेकर वो धरने पर बैठ गए। रक्षित की मौत को आत्म हत्या बताने पर उनका परिवार दुखी और क्रोधित था। रक्षित के परिजनों का कहना था कि वह आत्महत्या नहीं कर सकता। परिवार ने बताया की गुरुवार रात को  उसने घर पर फोन कर उनके साथ हंसी-खुशी बात की थी, लेकिन इसके कुछ देर बाद उन्हें जानकारी मिली कि रक्षित की गोली लगने से मौत हो गई है।

अब भले ही जवान के परिजन अपने बेटा के सम्मानजनक अंतिम संस्कार की लड़ाई जीत गए हों, लेकिन उसकी मौत की लड़ाई उनके लिए अभी बाकी है।  परिजन रक्षित की मौत के मामले पर संदेह जता रहे हैं। खैर इन सभी विवादों के बीच देश के इस लाल को तिरंगे में लिपटाकर आखिरी विदाई दी गई। रविवार को पोस्टमार्टम के बाद रक्षित के शव को सेना की फूलों से सजी गाड़ी में रखकर शास्त्री नगर श्मशान घाट ले जाया गया, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।  बेटे के सम्मान के साथ विदाई पर परिवार को थोड़ी संतुष्टी मिली है लेकिन अभी वो अपने बेटे के मौत के कारणों को जानने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि हमें इंसाफ तब मिलेगा जब रक्षित के मौत के असली कारणों का पता चलेगा।

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