बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजद नेता तेजस्वी का बड़ा ऐलान, 10 लाख युवाओं को देंगे नौकरी

 

नई दिल्ली : Election Commission द्वारा बिहार विधानसभा चुनाव के तारीखों का ऐलान कर दिया गया है, जिसे लेकर तमाम पार्टियां अपना कमर कस चुंकी है। एक तरफ जहां जदयू और उनके सहयोगी दल कृषि बिल और बिहार के विकास की बात कहकर लोगों को रिझाने में लगे है। वहीं दूसरी तरफ राजद नेता एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव बिहार में परिवर्तन की बात कह रहें है और लगातार सत्तापक्ष को घेर रहे है।

आपको बता दें कि इस विधानसभा चुनाव में अपनी नींव मजबूत करने के लिए राजद नेता तेजस्वी यादव ने सरकार बनते ही 10 लाख युवाओं को नौकरी देने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी सरकार बनती है तो पहली ही कैबिनेट बैठक में बिहार के 10 लाख युवाओं को नौकरी का आदेश देंगे।

तेजस्वी यादव ने कहा, बिहार में 4 लाख 50 हजार रिक्तियां पहले से ही हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, गृह विभाग सहित अन्य विभागों में राष्ट्रीय औसत के मानकों के हिसाब से बिहार में अभी 5 लाख 50 हजार नियुक्तियों की अत्यंत आवश्यकता है। तेजस्वी यादव ने अपने ट्वीट में लिखा कि, पहली कैबिनेट में पहली कलम से बिहार के 10 लाख युवाओं को नौकरी देंगे।


आपको बता दें कि इससे पहले तेजस्वी लगातार रोजगार के मुद्दे पर नीतीश सरकार को घेरते रहे है। इसके साथ ही वे केंद्र सरकार पर भी युवाओं को नौकरी देने के नाम पर ठगने का आरोप लगा चुंके है। बता दें कि पिछले ही दिन तेजस्वी यादव ने कहा था कि, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार में बिहार 26वें नंबर पर है। राज्य में निवेश और उद्योग लगाने में बिहार सबसे फिसड्डी राज्य है। उदारीकरण के बाद 15 वर्षों से सत्ता संभाल रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और एनडीए सरकार इन आंकड़ों पर बात क्यों नहीं करते?

इसके अलावा उन्होंने केंद्र सरकार के हालही में पास हुए कृषि बिल को लेकर एनडीए सरकार को घेरा। इस दौरान वे अपने कार्यकर्ताओं के साथ नजर आएं, जिसमें वे ट्रैक्टर चला रहे थे। कृषि बिल के खिलाफ तेजस्वी यादव ने कहा, एनडीए सरकार ने अन्नदाताओं को अपने फंडदाताओं की कठपुतली बना दिया है. जितनी हड़बड़ी में किसान बिल पास करवाया गया है इससे जाहिर होता है कि इसमें कुछ गड़बड़ी है. इस सरकार को किसान की शान और किसान की जान की रत्ती भर भी परवाह नहीं है।

आपको बता दें कि इससे पहले राजद प्रमुख भी लालू यादव भी इन सभी वादों और दावों को लेकर सुर्खियों में थे, जिसमें प्रमुख रोजगार और शिक्षा था। लेकिन अपने वादे पूरे नहीं होने के कारण जनता ने उन्हें दरकिनार कर दिया। अब देखना यह है कि 2020 के विधानसभा चुनाव में जनता का मत किस ओर बैठता है, जिसका निर्णय 10 नवंबर पर निर्भर है।

From around the web