बिहार के एक ऐसे सीएम जिन्होंने बिना वोट मांगे ही 15 सालो तक किया शासन, ...नहीं मांगा वोट

 

नई दिल्ली : बिहार विधानसभा चुनाव होने में महज कुछ दिन शेष है, उससे पहले ही नेताओं का तांता लग गया है, जो अपने क्षेत्रों का दौरा कर रहे है और आम जन को अपने सपोर्ट में करने की कोशिश कर रहे है। आपने अभी तक देखा होगा कि चुनाव कोई भी हो प्रत्येक नेता जनता को अपने पक्ष में वोट करने के लिए तरह-तरह के प्रलोभन देते है और आम जनता को अपने पक्ष में करते है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिहार में भी एक ऐसे नेता और सीएम थे, जिन्होंने सीएम चुनाव के दौरान कभी जनता के बीच जाकर वोट नहीं मांगा।

उनका कहना था कि जनता उन्हें समर्थन करेगी, अगर वो जनता के हित के लिए काम करेंगे। नहीं तो कितना भी कुछ हो जाएं, जनता उन्हें वोट नहीं देगी। आपको बता दें कि उन्हें आधुनिक बिहार का शिल्पकार भी कहा जाता है। हम बात कर रहे है, बिहार के पूर्व सीएम श्रीकृष्ण उर्फ श्रीबाबू की, जो 1946 से लेकर 1961 तक सीएम की पद पर बने रहें। उनके ही शासनकाल में राज्‍य में पहली बार औद्योगिक क्रांति आई थी। उन्‍होंने लम्‍बे समय तक मुख्‍यमंत्री के तौर पर काम किया था। जब भी चुनाव आते वो अपने विधानसभा क्षेत्र में खुद के लिए वोट मांगने नहीं गए। उनका सिद्धांत था कि यदि मैंने काम किया है तो जनता बिना मांगे मुझे वोट देगी।

आपको बता दें कि श्रीकृष्ण ने वैसे तो 1946 में ही बिहार में सीएम की कुर्सी संभाल ली थी। 1957 में उन्होंने शेखपुरा जिले के बरबीघा से चुनाव लड़ा, जिस दौरान उनके प्रचार के लिए सहयोगी सक्रिय थे। लेकिन श्री बाबू बरबीघा सीट में प्रचार के लिए नहीं जाते थे। एक बार जब उनके सहयोगियों ने श्रीकृष्ण से इसकी वजह पूछा तो उन्‍होंने कहा कि वह अपने लिए वोट मांगने नहीं जाएंगे। उनका कहना था कि अगर मैंने काम किया है या जनता मुझे अपने नेता के लायक समझेगी, तो मुझे खुद ही वोट देगी।

आपको बता दें कि बिहार केसरी के नाम से मशहूर श्री कृष्ण सिंह उर्फ श्रीबाबू का जन्‍म बिहार के नवादा जिले स्थित खनवां गांव में हुआ था। उन्हें करीब से जानने वाले लोग कहते हैं कि श्रीबाबू उसूलों से कभी कोई समझौता नहीं करते थे। बिहार में जमींदारी प्रथा खत्म करने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है। वे हमेशा वीआईपी व्‍यवस्‍था से दूरी बना कर आम लोगों के लिए सुलभ रहते थे। इसी वजह से उनकी लोकप्रियता बहुत ज्‍यादा थी।

श्रीबाबू के बारे में एक बहुत पुरानी किस्‍सा प्रचलित है कि सीएम रहते हुए जब अपने गांव आते थे, तब वह सिक्‍योरिटी गार्डस को गांव के बाहर ही रोक देते थे। अपनी सुरक्षा गार्ड से कहते थे कि यह मेरा गांव है, यहां मुझे कोई खतरा नहीं है। वह अपने गांव के अंदर बिल्कुल देसी अंदाज में रहते थे। किसी को महसूस ही नहीं होता था कि उनके राज्‍य का सीएम उनके बीच में है।

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