एक बार फिर बिहार में थम जाएगी 5 लाख जिंदगीयां !, जुड़े गांधी सेतु बचाओ अभियान के साथ

 

रिपोर्ट : अरूण कुमार

बिहार : उत्तर बिहार की लाइफलाइन गांधी सेतु पुल के बारे में आपने तो सुना ही होगा, जो देश की ही नहीं बल्कि एशिया की सबसे लंबा पुल है, जिसकी हालत पिछले कुछ समयों से जर्जर थी। जिसे लेकर सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्र सरकार ने पुल के पुनः जीर्णोद्धार का सोचा, हालांकि उस दौरान उन्होंने जनसमस्या को दरकिनार कर दिया और पुल निर्माण के कार्य को पूरा किया। इस दौरान उस पुल के रास्ते जाने वाले तकरीबन 5 लाख लोग रोजाना घंटों जाम में फंसे रहें, वहीं जिस पटना को बिहार की राजधानी और दिल कहा जाता है, वह थम सी गई। जिसने ना जानें कितने दिलों का थाम लिया और यह पुल जो कभी आम नागरिकों के रोजी-रोटी का साधन होता था, वो एक बड़ी जन समस्या को लेकर सामने आया।

इन सारी समस्याओं को देखकर डॉक्टर मृणाल झा ने सरकार को जगाने के लिए गांधी सेतु बचाओ अभियान से एक मुहिम छेड़ा है, जिसके जरिए वो सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अपने मद में चूर केंद्र सरकार को जगा सकें। साथ ही उन्हें उन जनसमस्याओं से रूबरू करवाएं, जिसके कारण ना जानें कितनी जिंदगीयां मौत और जिंदगी की लड़ाई लड़ते हुए इस पुल के जाम की शिकार हो गई, और जो पुल कभी उत्तर बिहार की लाइफलाइन बनी थी, वो डेथलाइन बनकर सबके सामने आया।  

आपको बता दें कि गांधी सेतु का जब पश्चिमी लेन बन रहा था तो पूर्वी लेन ही एक सहारा था, आवागमन के लिए ऐसे में घंटों लोग जाम में फंसे रहते थे। जिसे देखकर नगर पालिका हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉक्टर मृणाल झा ने गांधी सेतु बचाव नाम का एक अभियान शुरू किया। डॉक्टर मृणाल कहते हैं कि गांधी सेतु के पूर्वी लेन को तब तक नहीं तोड़ा जाए जब तक की इसका कोई वैकल्पिक व्यवस्था ना हो जाए। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार के परिवहन मंत्री नंदकिशोर यादव समेत कई पदाधिकारियों को पत्र लिखा और उनसे आग्रह किया है कि पूर्वी ले तब तक नहीं तोड़ा जाए, जब तक कि उसका कोई वैकल्पिक व्यवस्था ना हो जाए। इससे उस पुल पर गुजरने वाले पांच लाख लोगों की समस्या का समाधान हो जाएगा।

डॉक्टर मृणाल बताते हैं कि गांधी सेतु पर प्रतिदिन 500000 लोग सफर करते हैं जो तीन चार घंटे जाम से जूझते हैं। अगर इस आंकड़े को रुपए में कन्वर्ट किया जाए और प्रति व्यक्ति सौ रुपया भी जोड़ा जाए तो प्रति माह डेढ़ सौ करोड़ रूपए होता है यानी साल का लगभग अट्ठारह सौ करोड़ रूपया। इतने में प्रतिवर्ष एक नया गांधी सेतु जैसा पुल बनाया जा सकता है। इसलिए सरकार से आग्रह है कि गांधी सेतु को जनहित में उसके पूर्वी लेन को ना तोड़ा जाए जब तक कि उसका कोई वैकल्पिक व्यवस्था ना हो।

बता दें कि गांधी सेतु बचाओ अभियान #GandhiSetuBachao के तहत आज डॉक्टर मृणाल ने आह्वान किया है, जिससे 2 अगस्त को यानी रविवार को 12:00 से 5:00 के बीच ट्विटर पर # गांधी सेतु बचाओ के साथ आम लोग भी अपने संदेश को सरकार के लिए लिखें ।आपका संदेश ट्विटर के जरिए सरकार तक पहुंचेगी तो यह जन समस्या उम्मीद है कि अपने आप दूर हो जाएं।

आपको बता दें कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शुक्रवार को महात्मा गांधी सेतु के पश्चिमी लेन के सुपर स्ट्रक्चर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर नितिन गडकरी ने कहा कि पटना में गंगा नदी पर नए फोरलेन पुल के निर्माण का कार्य इसी साल अक्टूबर में शुरू कर दिया जाएगा। लेकिन जिस तरह उन्होंने जनसमस्या को दरकिनार कर अपनी पीठ थपथपाई वो उनकी गलत नीति को बताता है, अगर वे सहीं नीति बनाते तो, गडकरी इसके साथ ही वैकल्पिक रास्ते की भी बात करते, जिससे आम नागरिकों को कष्ट ना हो सकें। या तो हमारे बिहार के नेता बिहार की जनता को कष्टभोगी समझ बैठे है, या वो अपने दायित्व का सहीं से निर्वाहन नहीं कर रहीं। इसलिए आप सभी ट्विटर पर गांधी सेतु बचाओ को ट्वीट कर नीतीश सरकार को उनके दायित्व से रूबरू करवाएं, साथ ही रिट्वीट और कमेंट भी करें।

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