राजीव शुक्ला बनेंगे बीसीसीआई उपाध्यक्ष, बोर्ड में होंगे ये भी बदलाव

 

नई दिल्ली: बीसीसीआई और इंडियन प्रीमियर लीग के पूर्व चेयरमैन राजीव शुक्ला एक बार फिर चर्चा में है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और दिग्गज क्रिकेट प्रशासक राजीव शुक्ला का भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का उपाध्यक्ष बनना तय हो गया है। क्रिकेट प्रशासन से लेकर राजनित में भी अच्छा अनुभव रखने वाले कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई के नए उपाध्यक्ष बनने की संभावना जताई जा रही है।

इससे पहले साल 2019 में भी सौरव गांगुली के बोर्ड अध्यक्ष बनने से पहले राजीव शुक्ला के उपाध्यक्ष बनने को लेकर लगातार अटकलें जारी थी। बता दें की राजीव शुक्ला इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के चेयरमैन के पद पर 2018 में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। साथ ही 2017 तक उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) के अध्यक्ष भी रहे हैं। राजीव शुक्ला के बीसीसीआई वाइस प्रेसिडेंट बनने से बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली को भी एक अनुभवी साथी मिलेगा। 

वहीं राजीव शुक्ला के साथ ही बृजेश पटेल और एम. खेरुल जमाल मजूमदार का काउंसलर बनना तय है। इन तीनों ने इन पदों के लिए नामांकन दाखिल किया है, जिसे वैध मान लिया गया है। इन तीन पदों पर और कोई उम्मीदवार नही है। दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष रोहन जेटली ने अपने पिता और डीडीसीए के पूर्व अध्यक्ष अरुण जेटकी के पुराने दोस्त और आईपीएल के पूर्व कमिश्नर शुक्ला के नाम का प्रस्ताव दिया था।

इन तीन खाली पड़े पदों के लिए चुनाव 24 दिसम्बर को होने वाले एजीएम में होना है लेकिन चूंकी अब चुनाव में प्रतिस्पर्धा की स्थिति नहीं है लिहाजा इलेक्ट्रोरल ऑफिसर अचल कुमार जोती को बस इन तीनों के नामों की घोषणा भर करनी है। हालांकि उम्मीदवारों के नाम वापस लेने के लिए शनिवार तक का समय निर्धारित है।

उपाध्यक्ष पद माहिम वेर्मा के इस्तीफे के बाद खाली पड़ा था, जो कि अब अपने गृह प्रदेश उत्तराखंड चले गए हैं। वहां वह राज्य क्रिकेट संघ के सचिव चुने गए हैं। जहां तक काउंसलर्स की बात है तो ये पद एक साल के लिए हैं और इनका चुनाव औपचारिक तौर पर होना था।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त जोती शनिवार को इन तीन पदों पर नामांकन करने वाले उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करेंगे। इसी के साथ इन के इन पदों पर आसीन होने का रास्ता साफ हो जाएगा। अगर इन तीन पदों के लिए प्रतिस्पर्धा होती तो फिर एजीएम के दौरान बकायदे चुनाव होता।
 

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