सपा के कद्दावर नेता अमर सिंह को मुलायम सिंह ने क्यों किया निष्कासित? कभी थे साथ के साथी

 

रिपोर्ट : शिखा शर्मा

नई दिल्ली : लंबे समय से लगातार बिमारी से जूझ रहे समाजवादी पार्टी के पूर्व कद्दावर नेता अमर सिंह नहीं रहे। आपको बता दें कि ये अमर सिंह वहीं सिंह थे, जिन्होंने सपा को सपा बनाने के लिए जी तोड़ मेहनत की। हालांकि एक समय ऐसा आया जब इस सिंह को सपा के ठेकेदारों ने बेआबरू कर बाहर निकाल दिया, अब हाल ये है कि आज वहीं सपा अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहा है। क्योंकि अमर सिंह शुरू से ही राजनीति में दागी उम्मीदवार के पक्ष में नहीं थे, साथ ही अखिलेश उन्हें अपने रास्ते का रोड़ा समझते थे, जिस कारण उन्हें सपा के मुखिया मुलायम सिंह निष्कासित किया।

क्या थे वे कारण

ऐसा कहा जाता है कि अखिलेश सपा की मुखिया का पद पाने के लिए साम, दाम, दंड, भेंद सब अपना चुंके थे, लेकिन एक समय में सपा के मजबूत नींव कहे जाने वाले अमर सिंह उनकी आंखों में खटकने लगे। जिसके बाद उन्होंने कुछ ऐसी परिस्थिति उत्पन्न की जिस कारण मुलायम को अमर सिंह को निकालना पड़ा। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि सपा में दागी उम्मीदवारों और कार्यप्रणाली से अमर सिंह नाखुश थे, जिस कारण उन्होंने कई बार सपा में रहते रहते, इशारों इशारों में बीजेपी की तारीफ की थी। जो सपा के मुखिया मुलायम सिंह और अखिलेश यादव को नागवार गुजरा और मुलायम ने उनका निष्कासन कर दिया। हालांकि अमर सिंह ने सपा द्वारा निष्कासन से पहले ही समाजवादी पार्टी का दामन छोड़ दिया था।  

अगर हम उनके जन्म की बात करें तो अमर सिंह का जन्म 27 जनवरी 1956 को आजमगढ़ में हुई थी, जो समाजवादी पार्टी के नेताओं में से एक रहे हैं। अमर सिंह अपने समाजवादी पार्टी से राजनैतिक सम्बंधों  के लिए जाने जाते हैं। वे समाजवादी पार्टी के महासचिव व भारतीय संसद के ऊपरी सदन राज्य सभा के सदस्य भी रह चुके हैं। बता दें कि 6 जनवरी 2010 को, इन्होंने समाजवादी पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद सपा पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने उन्हें 2 फ़रवरी 2010 को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद इन्होंने  अपने राजनीति सफर से सन्यास ले लिया ।

आपको बता दें कि अमर सिंह  को मुलायम सिंह का दाहिना हाथ कहा जाता था  साल 2016 में  इनकी समाजवादी पार्टी में पुनः वापसी हुई और राज्य सभा के लिए चुने गये । एक समय मुलायम सिंह यादव के खास कहे जाने वाले अमर सिंह साल 2017 के पहले ही किनारे लगने लगे थे। सपा में शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के झगड़े में अखिलेश ने अमर सिंह को विलेन माना। कई बार तो अखिलेश यादव ने खुलेआम अमर सिंह की आलोचना की। बाद में अमर सिंह भी बीजेपी के कार्यक्रमों में नजर आने लगे। उन्होंने आरएसएस से जुड़े संगठन को अपने पूरी संपत्ति दान करने का भी ऐलान किया था।

अमर सिंह ने समाजवादी पार्टी छोड़ने के बाद अपनी पार्टी बना ली थी। एक समय वह सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के सबसे विश्वासपात्र माने जाते थे। उन्होंने उसी दौरान एक ट्वीट कर कहा था कि वह सपा में कभी नहीं लौटे। अमर सिंह ने 6 जनवरी 2010 को समाजवादी पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था और बाद में उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।

हालांकि, बीमार होने से पहले तक उनकी नज़दीकियाँ भाजपा (BJP ) से बढ़ रही थीं। वे समाजवादी से अलग होकर नरेंद्र मोदी और भाजपा के समर्थन में आए दिन बयान दे रहे हैं। उन्होंने अखिलेश यादव को नमाज़वादी भी घोषित कर दिया है।

आपको बता दें कि मार्च में उनके निधन की अफवाह उड़ी थी  जिस पर 2 मार्च को उन्होंने एक अन्य वीडियो संदेश पोस्ट करते हुए उन कयासों पर विराम लगाया था, वीडियो के साथ एक लाइन में छोटा सा संदेश लिखा था- टाइगर जिंदा है।

अमर सिंह के प्रोफाइल को देखकर लगता है कि वह बीमार होने के बावजूद सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते थे। आज भी निधन से पहले  दिन में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी थी और सभी फॉलोअर्स को ईद अल अजहा के मौके पर उन्हें बधाई भी दी। हालांकि अचानक आईं उनकी निधन की खबर ने सभी को शॉक्ड कर दिया। बता दें कि अमर सिंह का निधन आज यानी शनिवार को 1 बजे हुआ।

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