74 साल की उम्र में केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का निधन, चिराग ने किया भावुक ट्वीट

 

नई दिल्ली : लंबे समयों से स्वास्थ कारणों से जूझ रहें रामविलास ने आज अपने जिंदगी को अलविदा कह दिया, जो राजनीतिक जगत के लिए एक बहुत बुरी खबर है। गौरतलब है कि जल्द ही बिहार में विधानसभा चुनाव होने है, जिसे लेकर सभी पार्टियां अपनी कमर कस चुंकी है, वहीं चिराग भी अपने पिता के सपनों को साकार करने के लिए कई कदम आगे बढ़ चुंके हैं, इसी बीच उनके पिता रामविलास पासवान का जाना उनके लिए काफी हृदयविदारक है।

आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवन के निधन की खबर उनके बेटे चिराग पासवान ने ट्वीट कर यह जानकारी दी। उन्होंने लिखा, "पापा... अब आप इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन मुझे पता है कि आप जहां भी हैं हमेशा मेरे साथ है।"

आपको बता दें कि रामविलास पासवान केंद्र सरकार में उपभोक्ता मंत्री थे, जिन्होंने अपने 5 दशक से भी ज्यादा लंबे राजनीतिक करियर में 8 बार लोकसभा सदस्य रहे। पिछले दो दशक में वह लगभग हर केंद्र सरकार में शामिल रहे और मंत्री बनें।

अगर हम उनके जीवन की बात करें तो रामविलास पासवान का जन्म एक दलित परवार में 5 जुलाई 1946 को बिहार के खगड़िया जिले के शाहरबन्नी गांव में हुआ था।1969 में उनका चयन डीएसपी पद के लिए हो गया था लेकिन उनकी किस्मत में राजनीति लिखी थी, और उन्होंने अपना पग राजनीतिक की ओर कर लिया। आपको बता दे कि रामविलास के राजनीतिक करियर की शुरूआत 1969 में हुआ था वह संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर बिहार विधानसभा के सदस्य बने थे। इमरजेंसी के दौरान वह जेल में रहे और आपतकाल खत्म होने के बाद उन्होंने जनता दल ज्वाइन कर लिया।

जनता दल के ही टिकट पर उन्होंने हाजीपुर संसदीय सीट से 1977  का आम चुनाव लड़ा और एतिहासिक अंतर से जीत दर्ज की। उन्होंने  1980 और 1989 के लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज की और पहली बार विश्वनाथ प्रताप सिंह की कैबिनेट में केंद्र में मंत्री बनें। इसके बाद से पासवान लगातार केंद्र की राजनीति में सक्रिय रहे। वह कभी बीजेपी तो कभी कांग्रेस, कभी आरजेडी तो कभी जदयू के साथ कई गठबंधनों में रहे और केंद्र सरकार में मंत्री बने रहे।

पासवान ने विभिन्न सरकारों में रेल से लेकर दूरसंचार और कोयला मंत्रालय तक की जिम्मेदारी संभाली। शायद यही कारण था कि उन्हें भारतीय राजनीति का 'मौसम वैज्ञानिक' भी कहा जाने लगा क्योंकि केंद्र में किसी की भी सरकार बने वे मंत्री जरूर बन जाते थे।

आपको बता दें कि 2002 में गुजरात दंगों की वजह से उन्हें वाजपेयी सरकार से इस्तीफा दिया और एनडीए भी छोड़ दिया। इसके बाद वे यूपीए से जुड़े और मनमोहन सिंह के दोनों कार्यकाल में केंद्रीय कैबिनेट में जगह मिली। 2014 में वे राजनीतिक हवा को भांप कर  UPA को छोड़ NDA में शामिल हो गये। और फिर 2014, 2019 में बनी नरेंद्र मोदी की दोनों सरकारों में वह केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल रहे। आपको बता दें कि राम विलास पासवान ने दो शादियां की है। उनकी पहली पत्नी से दो बेटियां हैं, जबकि दूसरी पत्नी से एक बेटे चिराग पासवान व एक बेटी है।

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