केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया वर्चुअली पहला ब्लास्ट, 3 मिनट का सफर 15 मिनट तय

 

नई दिल्ली : 3 घंटे का सफर 15 मिनट में तय होगा, जो जोजिला टलन से तय होगा। आपको बता दें कि इससे पहले अटल टनल का भी शुभारंभ पीएम मोदी ने किया था। बता दें कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 14.15 किलोमीटर लंबी जोजिला टनल में निर्माण कार्य के लिए वर्चुअली पहला ब्लास्ट किया, जो श्रीनगर, द्रास, कारगिल और लेह को सभी मौसम में कनेक्टिविटी मुहैया कराएगी। आपको बता दें कि इस सुरंग के बनने से श्रीनगर घाटी और लेह के बीच बारहमासी संपर्क सुविधा मिल सकेगी।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि यह एशिया की सबसे लंबी टनल है और निश्चित रूप से लेह, लद्दाख और कश्मीर की अर्थव्यवस्था बदलने में इसका उपयोग होगा। हमारे विभाग के सभी लोगों के प्रयासों से इस टनल के काम में हमने करीब 4,000 करोड़ रुपये की बचत भी की है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक, 'सुरंग राष्ट्रीय राजमार्ग-1 पर श्रीनगर घाटी और लेह के बीच द्रास और करगिल होते हुए सभी मौसम में उपयोगी संपर्क सुविधा उपलब्ध कराएगी। इससे जम्मू-कश्मीर में चौतरफा आर्थिक और सामाजिक-सांस्कृतिक समन्वय हो सकेगा।'

आपको बता दें कि इस परियोजना के अंतर्गत जोजिला दर्रे के तहत करीब 3000 मीटर की ऊंचाई पर 14.15 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जाएगी, जिससे केवल छह महीने ही इस मार्ग से वाहन आ-जा सकते हैं। बयान के मुताबिक यह सुरंग जब बनकर तैयार होगी, वह आधुनिक भारत के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि होगी। बता दें कि लद्दाख, गिलगिट और बाल्टिस्तान क्षेत्रों में बड़े स्तर पर सैन्य गतिविधियों को देखते हुए यह देश की रक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

अगर हम परियोजना के महत्व की बात करें तो, यह जोजिला दर्रा श्रीनगर-करगिल-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर 11,578 फुट की ऊंचाई पर है, जो भारी हिमपात के कारण जाड़े में बंद रहता है। आपको बता दें कि यह मार्द दुनिया के सबसे खतरनाक मार्गों में से एक है और संवेदनशील भी। आपको बता दें कि इस सुरंग के निर्माण से करगिल, द्रास और लद्दाख क्षेत्र के लोगों की 30 साल की मांग पूरी होगी, जिससे श्रीनगर-करगिल-लेह खंड में यात्रा हिमस्खलन मुक्त होगी। जिससे जो यात्रा 3 घंटे में पूरा होता था, वो 15 मिनट में पूरा होगा। वहीं यह यात्रा सुरक्षित भी होगी।

आपको बता दें कि इस परियोजना का पुनः आवंटन मेघा इंजीनियरंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लि. (एमईआईएल) ने किया है। बता दें कि इस परियोजना के लिए सबसे कम 4509.5 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी। जिसमें अन्य दो बोलीदाता कंपनियां लार्सन एंड टूब्रो और इरकॉन इंटरनेशनल जेवी थी। आपको बता दें कि पीएम मोदी ने मई 2018 में 6800 करोड़ रुपये की लागत से इस परियोजना की आधारशिला रखी थी।

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