RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, कहा संघ के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ 

 

नई दिल्ली : देश में जारी नवरात्रि उत्सव के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बड़ा दिया हैं, उन्होंने कहा है कि संघ के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है, जो पहले कभी नहीं हुआ। वहीं उन्होंने कहा कि देश में आएं कोरोना महामारी ने उन सभी मुद्दो को दबा दिया, जिसका समाधान अभी तक हो जाना था, लेकिन नहीं हो सका।

विजयादशमी उत्सव के संबोधन के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि मार्च महीने में लॉकडाउन शुरू हुआ। बहुत सारे विषय उस दौरान दुनिया में चर्चा में थे। वे सारे दब गए। उनकी चर्चा का स्थान महामारी ने ले लिया।

उन्होंने कहा कि, विजयादशमी के पहले ही 370 प्रभावहीन हो गया था। संसद में उसकी पूरी प्रक्रिया हुई। वहीं विजयादशमी के बाद नौ नवंबर को राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का असंदिग्ध फैसला आया। जिसे पूरे देश ने स्वीकार किया। पांच अगस्त को राम मंदिर निर्माण का जो पूजन हुआ, उसमें भी, उस वातावरण की पवित्रता को देखा और संयम और समझदारी को भी देखा।

मोहन भागवत ने कहा कि, नागरिकता संशोधन कानून भी संसद की पूरी प्रक्रिया के बाद पास हुआ। पड़ोसी देशों में दो तीन देश ऐसे हैं, जहां सांप्रदायिक कारणों से उस देश के निवासियों को प्रताड़ित करने का इतिहास है। उन लोगों को जाने के लिए दूसरी जगह नहीं है, भारत ही आते हैं। विस्थापित और पीड़ित यहां पर जल्दी बस जाएं, इसलिए अधिनियम में कुछ संशोधन करने का प्रावधान था। जो भारत के नागरिक हैं, उनके लिए कुछ खतरा नहीं था।

उन्होंने कहा कि, ''नागरिकता संशोधन अधिनियम कानून का विरोध करने वाले भी थे। राजनीति में तो ऐसा चलता ही है। ऐसा वातावरण बनाया कि इस देश में मुसलमानों की संख्या न बढ़े, इसलिए नियम लाया। जिससे प्रदर्शन आदि होने लगे। देश के वातावरण में तनाव होने लगा। इसका क्या उपाय हो, यह सोच विचार से पहले ही कोरोना काल आ गया। मन की सांप्रदायिक आग मन में ही रह गई। कोरोना की परिस्थिति आ गई। जितनी प्रतिक्रिया होनी थी, उतनी नहीं हुई। पूरी दुनिया में ऐसा ही दिखता है। बहुत सारी घटनाएं हुईं हैं, लेकिन चर्चा कोरोना की ही हुई।''

इसके साथ ही मोहन भागवत ने चीन को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि, ''इस महामारी के संदर्भ में चीन की भूमिका संदिग्ध रही यह तो कहा ही जा सकता है, परंतु भारत की सीमाओं पर जिस प्रकार से अतिक्रमण का प्रयास अपने आर्थिक सामरिक बल के कारण मदांध होकर उसने किया वह तो सम्पूर्ण विश्व के सामने स्पष्ट है।''

आपको बता दें कि RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अपना ये बयान नागपुर के रेशमबाग में दिया हैं, जिहां सिर्फ संघ के 50 स्वयंसेवक मौजूद थें, जिसे लेकर भागवत ने कहा कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ हैं, जब किसी उत्सव में संघ के सबसे कम स्वयंसेवक मौजूद हुए हो। गौतरलब है कि संघ के अधिकतर स्वयंसेवकों ने इस उत्सव के दौरान ऑनलाइन मौजूदगी दर्ज किया है।    

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