पीएम मोदी ने दिया देश को पहली ड्राइवरलेस मेट्रो का सौगात, दौड़ेगी इस रूट में

 

नई दिल्ली : नये साल के आने से पहले ही पीएम मोदी लगातार देश को सौगात दे रहे है, चाहे वह किसानों को लेकर हो या किसी राज्य को लेकर। आपको बता दें कि अब पीएम मोदी ने नई दिल्ली मेट्रो को बड़ा सौगात दिया है, जिससे नई दिल्ली पहली ऐसी राजधानी होगी जहां मेट्रो की पटरी पर ड्राइवरलेस मेट्रो दौड़ेगी। बता दें कि पीएम मोदी ने सोमवार को इस ड्राइवरलेस मेट्रो को हरी झंडी दिखाई।

आपको बता दें कि पहले चरण में ड्राइवरलेस मेट्रो मजेंटा लाइन पर जनकपुरी पश्चिम से नोएडा के बॉटनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन तक दौड़ेगी, जिसे बाद में आगे भी बढ़ाया जाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि देश में 2025 तक करीब 25 शहरों में मेट्रो चलाने का प्लान है। उन्होंने कहा कि आज से 3 साल पहले मेजेंटा लाइन की शुरुआत हुई थी, अब इसी लाइन पर ड्राइवरलेस मेट्रो की शुरुआत हो रही है।

पीएम मोदी ने कहा कि कुछ वक्त पहले तक भ्रम की स्थिति बनी रहती थी, लेकिन कोई भविष्य की तैयारी नहीं थी। जिसके कारण शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर की मांग और पूर्ति में काफी अंतर आया। शहरीकरण को चुनौती ना माना जाए और अवसर के तौर पर इस्तेमाल किया जाए।

उन्होंने कहा कि 2014 में सिर्फ 5 शहरों में मेट्रो रेल थी। आज 18 शहरों में मेट्रो रेल की सेवा है। वर्ष 2025 तक हम इसे 25 से ज़्यादा शहरों तक विस्तार देने वाले हैं, साल 2014 में देश में सिर्फ 248 किलोमीटर मेट्रो लाइन्स आपरेशनल थीं। आज ये करीब तीन गुनी यानी सात सौ किलोमीटर से ज़्यादा है। दिल्ली में मेट्रो की चर्चा बरसों तक चली लेकिन पहली मेट्रो अटल जी के प्रयासों से चली।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेट्रो सर्विसेस के विस्तार के लिए, मेक इन इंडिया महत्वपूर्ण है। मेक इन इंडिया से लागत कम होती है, विदेशी मुद्रा बचती है, और देश में ही लोगों को ज़्यादा से ज़्यादा रोज़गार मिलता है। रोलिंग स्टॉक के मानकीकरण से हर कोच की लागत अब 12 करोड़ से घटकर 8 करोड़ पहुंच गयी है।

उन्होंने कहा कि वन नेशन, वन राशनकार्ड से एक स्थान से दूसरे स्थान जाने वाले नागरिकों को नया राशनकार्ड बनाने के चक्करों से मुक्ति मिली है। इसी तरह नए कृषि सुधारों और e-NAM जैसी व्यवस्थाओं से वन नेशन, वन एग्रीकल्चर मार्केट की दिशा में देश आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन शहरों में बड़ी वाटर बॉडी हैं, वहां अब वाटर मेट्रो पर काम किया जा रहा है। इससे शहरों को बेहतर कनेक्टिविटी के साथ ही उनके पास मौजूद द्वीपों के लोगों को लास्ट माइल कनेक्टिविटी का लाभ मिल सकेगा। कोच्चि में ये काम तेज़ी से चल रहा है।

उन्होंने कहा कि हम ऐसे ब्रेकिंग सिस्टम का भी प्रयोग कर रहे हैं जिनमें ब्रेक लगाने पर 50 प्रतिशत उर्जा वापस ग्रिड में चली जाती है। आज मेट्रो रेल में 130 मेगावाट सोलर पावर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे बढ़ाकर 600 मेगावाट तक ले जाने का इरादा है।

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