किसानों के प्रदर्शन के बीच नीतीश सरकार का बड़ा फरमान, हिंसक प्रदर्शन किया तो...

 
रिपोर्ट: सौरभ सिंह 

पटना: देश में केंद्र सरकार के नए कृषि कानून के खिलाफ किसान लगभग 70 दिनों से ज्यादा समय से प्रदर्शन कर रहे हैं।किसानों को उम्मीद है कि इस प्रदर्शन से उनको फायदा होगा तो वही सरकार इस प्रदर्शन को सही नहीं मान रही है फिलहाल प्रदर्शन से दिल्ली एनसीआर के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बड़ा फैसला लिया है नीतीश कुमार के इस फैसले में बिहार में अब सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया तो लोगों की खैर नहीं है।

नीतीश कुमार  सरकार ने मंगलवार को एक नया फरमान जारी किया है जिसमें कहा गया है कि अगर राज्य में कोई भी विरोध प्रदर्शन सड़क जाम या ऐसे किसी अन्य मामलों में हंगामा हुआ और विधि व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होती है तो प्रदर्शन में शामिल व्यक्तियों को ना तो नौकरी मिलेगी ना ही ठेका।ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज होती है और किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप साबित होता है तो उसके पुलिस वेरीफिकेशन रिपोर्ट में इसका उल्लेख होगा। ऐसे मामले में संलिप्त होने पर व्यक्ति को ना तो नौकरी मिल सकेगी ना ही ठेका ले सकेगा।

बिहार में मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर अमर्यादित टिप्पणी करने पर कानूनी कार्रवाई के सरकारी फरमान का अभी विरोध चल ही रहा था कि बिहार पुलिस द्वारा हाल में दिए गए एक आदेश के बाद राज्य की सियासत फिर गर्म हो गई है। हालांकि सत्ता पक्ष पुलिस के बचाव में उतर आया है। बिहार पुलिस महानिदेशक एसके सिंघल ने एक आदेश में कहा है, यदि कोई व्यक्ति किसी विधि व्यवस्था की स्थिति, विरोध प्रदर्शन, सड़क जाम, इत्यादि मामलों में संलिप्त होकर किसी आपराधिक कृत्य में शामिल होता है और उसे इस कार्य के लिए पुलिस द्वारा आरोप पत्रित (चार्जशीट) किया जाता है, तो उनके संबंध में चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन में विशिष्ट एवं स्पष्ट रूप से प्रविष्टि की जाए। ऐसे व्यक्तियों को गंभीर परिणामों के लिए तैयार रहना होगा क्योकि उनमें सरकारी नौकरी, ठेके आदि नहीं मिल पाएंगें।सरकारी ठेके में चरित्र सत्यापन को अब अनिवार्य कर दिया गया है।

इधर, पुलिस महानिदेशक के इस आदेश के बाद राज्य की सियासत गर्म होती दिख रही है। विपक्ष इसे आम जनता के सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार का हनन मान रहा है जबकि सत्ता पक्ष इसे कानून व्यवस्था के हित में उठाया गया कदम बता रहा है।


तेजस्वी यादव ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर इस आदेश की कॉपी शेयर करते हुए लिखा, मुसोलिनी और हिटलर को चुनौती दे रहे नीतीश कुमार कहते हैं अगर किसी ने सत्ता व्यवस्था के विरुद्ध धरना-प्रदर्शन कर अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग किया तो आपको नौकरी नहीं मिलेगी। मतलब नौकरी भी नहीं देंगे और विरोध भी प्रकट नहीं करने देंगे। बेचारे 40 सीट के मुख्यमंत्री कितने डर रहे हैं?

हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने तेजस्वी के ट्वीट पर पलटवार करते हुए कहा कि धरना, प्रदर्शन कर आंदोलन करना सबका लोकतांत्रिक अधिकार है। उसकी आड़ में आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने वाले, तोड़फोड़ करने वाले उपद्रवी तत्वों के खिलाफ अगर कार्रवाई की बात हो रही हैं तो उपद्रवियों को मिर्ची लग रही है। उन्होंने कहा कि अब आप तय किजिए कि आप लोकतंत्र को मानते हैं या उपद्रव को।

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