Farmers Protest: गृह मंत्रालय के आदेश पर क्या बोले राकेश टिकैत

 

नई दिल्ली : केंद्र सरकार के नए 3 कृषि कानून के खिलाफ किसान आंदोलन का आज 66 दिन हैं। 26 जनवरी को हुए ट्रैक्टर रैली के बाद लाल किले पर जो घटना घटी उसके बाद से किसान आंदोलन कुछ कमजोर पड़ गया था। लेकिन आंदोलन में बृहस्पतिवार की घटना ने एक बार फिर नई जान डाल दी है। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत की भावुक अपील के बाद किसानों का गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंचने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। 

26 जनवरी की घटना के बाद जो तंबू उखड़ने शुरू हो गए थे और लंगर बंद कर दिए गए थे वो शुक्रवार को फिर से लगने शुरू हो गए। बीते 36 घंटों में आंदोलन स्थल का दायरा करीब चार गुना बढ़ गया है और किसानों की संख्या बढ़कर आठ से दस हजार तक पहुंच गई है। अचानक से आंदोलन स्थल पर पूरा नजारा बदल तो धरने में बैठे किसानों में भी नई ऊर्जा देखने को मिली।किसान आंदोलन में कई पार्टियों के नेता अपना समर्थन देने पहुंच रहे हैं। 

कृषि कानूनोें को वापस कराकर ही घर जाने की बात कर रहे हैं। वहीं सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर भी आंदोलन जारी है। वहीं आज आंदोलन कर रहे किसान 26 जनवरी की हिंसा पर दुख जताते हुए और महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में एक दिन के अनशन पर रहेंगे। किसान आज के दिन को सद्भावना दिवस के रूप में मना रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने आज कहा कि, कल यानी रविवार को बागपत में पंचायत करने के बाद हम दिल्ली कूच करेंगे। किसानों पर जो राजनीति हो रही है उस पर पंचायत में चर्चा करेंगे। 


उधर गृह मंत्रालय ने सिंघु, गाजीपुर, टिकरी बॉर्डर और उनके आस-पास के इलाकों में इंटरनेट सेवाओं को बंद करने का फैसला लिया है। सुरक्षा के मद्देनजर 29 जनवरी की रात 11 बजे से 31 जनवरी की रात 11 बजे तक इन इलाकों में इंटरनेट बंद रहेगा।  इंटरनेट बंद होने पर राकेश टिकैत के अपने कहा गाजीपुर बॉर्डर पर इंटरनेट बंद, किसानों की आवाज को रोका नही जा सकता है। अब देखना होगा की राकेश टिकैत की भावुक अपील के बाद एक बार फिर से किसान आंदोल में जान आई है उससे किसान आंदोलन पर कितना फर्क पड़ता हैं। फिलहाल राकेश टिकैत ने साफ कर दिया हैं जब तक सर्कार कानून खत्म नहीं करेगी तब तक वो घर नहीं जाने वाले। 

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