सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो हमने भी सरकार की बात नहीं मानी : किसान नेता राकेश टिकैत

 

नई दिल्ली : सरकार और किसान द्वारा जारी तीन कृषि कानून को लेकर जारी बैठक आज भी बेनतीजा रहा। एक तरफ जहां किसान इन तीनों कानून को सरकार द्वारा वापस लेने पर अड़े थे, तो वहीं सरकार इन बिलों में संशोधन की बात कहकर उन्हें मनाने की कोशिश कर रही थी। सरकार के बार-बार कहे जाने पर भी किसान नेता नहीं मानें। जिससे आठवें दौर के बैठक का भी कोई परिणाम नहीं निकला और एक बार फिर वार्ता के लिए 15 जनवरी की तारीख दी गई।

बैठक के बाद किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि तारीख पर तारीख चल रही है। बैठक में सभी किसान नेताओं ने एक आवाज़ में बिल रद्द करने की मांग की। हम चाहते हैं बिल वापस हो, सरकार चाहती है संशोधन हो। सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो हमने भी सरकार की बात नहीं मानी। वहीं अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव ने कहा कि सरकान ने हमें इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में चलने को कहा लेकिन हम ये नहीं कह रहे। हम ये कह रहे है कि ये नए कृषि क़ानून गैर-क़ानूनी है। हम इसके खिलाफ हैं। इन्हें सरकार वापिस ले। हम कोर्ट में नहीं जाएंगे। हम अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।

एक अन्य किसान नेता ने कहा कि 15 जनवरी को सरकार द्वारा फिर से बैठक बुलाई गई है। सरकार क़ानूनों में संशोधन की बात कर रही है, परन्तु हम क़ानून वापिस लेने के अलावा कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे। वहीं किसान यूनियनों और सरकार की बैठक पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि केवल इन तीन क़ानूनों को ख़त्म करने, न करने का विषय नहीं है, उसके अंदर कई प्रावधान हैं जिसपर बात चल रही है। अगर सिर्फ कृषि क़ानूनों को वापस लेने तक की बात होती तो अब तक ये बातचीत समाप्त हो चुकी होती।

आपको बता दें कि कृषि कानून को लेकर आंदोलनरत किसान 26 जनवरी को एक बार फिर ट्रैक्टर रैली निकालने की योजना बना रहें है, इसे लेकर जोरों-शोरों से तैयारी भी हो रही है। शामिल होने के लिए महिलाएं भी ट्रैक्टर चलाना सीख रही है। अब देखना यह है कि सरकार औऱ किसानों के बीच तय 15 जनवरी की बैठक में कृषि कानून को लेकर कोई निर्णय निकलता है, अगर नहीं तो फिर सरकार और आंदोलनरत किसानों की आगे की रणनीति क्या होगी?

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