हाथरस मामला: राहुल गांधी के साथ हुई बदसलूकी को संजय राउत ने बताया "लोकतंत्र का गैंगरेप"

 

रिपोर्ट : स्वाती सिंह

नई दिल्ली : हाथरस गैंपरेप मामले पर अब राजनीति गरम हो चुकी है। जहां एक तरह सरकार बनाम मीडिया चल रहा है तो वहीं अब विपक्ष भी इस मामले में हावी होती नजर आ रही है। आपको बता दें कि कल गुरुवार को देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस के युवा चेहरा और नेता राहुल गांधी के साथ हाथरस जाने के क्रम में जो धक्का मुककी हुई और उनको जिस तरह से जमीन पर गिरा दिया गया,  इसका विरोध पूरा देश कर रहा है। बता दें कि आज शुक्रवार को इसी कड़ी में शिवसेना नेता संजय राउत ने उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी एक राष्ट्रीय स्तर के राजनेता है। हमारे कांग्रेस के साथ मतभेद हो सकते हैं, लेकिन पुलिस ने उनके साथ जो व्यवहार किया है उसका कोई समर्थन नहीं कर सकता। एक राष्ट्रीय स्तर का नेता के गिरेबान तक किसी पुलिस वाले का हाथ कैसे पहुंच सकता है। राहुल गांधी का कॉलर पकड़ा गया और जमीन पर धक्का दे दिया गया। यह एक तरीके से देश के लोकतंत्र का गैंगरेप है।

संजय राउत यहीं नहीं रुके उन्होंने इसमें जांच की भी मांग की। उन्होंने कहा इसकी जांच होनी चाहिए। संजय राउत ने आगे कहा कि और अगर राष्ट्रीय नेता पीड़िता के परिवार से मिलने जा रहा है, उसे रोकने की बात मैं मानता हूं कि वहां 144 लगा है या लॉ एंड ऑर्डर कि स्थिति है लेकिन राहुल गांधी जैसे राष्ट्रीय नेता के साथ इस तरह का बर्ताव लोकतान्त्रिक देश में मान्य नहीं है। अंत में संजय राउत ने कांग्रेस के इतिहास और कांग्रेस के बड़े नेताओं के देश के लिए दिए बलिदान को याद करके कहा कि राहुल गांधी इंदिरा गांधी के पोते हैं यह हमें भूलना नहीं चाहिए। राहुल गांधी राजीव गांधी के बेटे भी हैं। इन सभी लोगों ने देश के लिए अपनी शहादत भी दी है। ऐसे इंसान का कॉलर पकड़ कर उनके साथ धक्का मुक्की की जा रही है। ये सही नहीं हैं।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के हाथरस में 14 सितंबर को एक दलित लड़के के साथ सवर्ण वर्ग के लड़कों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। युवती की जीभ काट दी थी और साथ ही मारते मारते उसकी रीढ़ की हड्डी भी तोड़ दी थी। युवती आखिरी में जिंदगी की जंग हार गई और उसकी मृत्यु हो गई। मामला प्रकाश में आने पर यूपी पुलिस ने आनन फानन में पीड़िता के शव को रात के 2.30 बजे जला दिया। न ही इस अंतिम संस्कार की जानकारी परिवार को दी गई थी और न ही परिवार को इसमें शामिल किया गया था। परिवार के आरोपों के बाद प्रशासन ने पलड़ा छाड़ते हुए कहा था कि शव खराब हो रहा था इसलिए इसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। पीड़िता के परिवार ने इस दावे को नकार दिया था।

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