Farmer Protest: किसान आंदोलन के हक में संत बाबा रामसिंह ने की आत्महत्या, लिखा ये पत्र

 

नई दिल्ली : देश में जारी किसान आंदोलन का आज 22वां दिन है, जिसे लेकर आज भी किसान प्रदर्शन कर रहे है। किसान के इसी आंदोलन को तेज करने को लेकर लगातार कई समाजसेवी, खिलाड़ी और देश के सेवानिवृत्त सैनिक भी शामिल हुए। इसी बीच किसान आंदोलन से एक ऐसी खबर सामने आई, जिसने हड़कंप मचा दिया। गौरतलब है कि किसान आंदोलन में शामिल एक बाबा ने खुद को गोली मार ली। गोली लगने से उनकी मौत हो गई है।

आपको बता दें कि इस बाबा का नाम संत बाबा राम सिंह है, जो करनाल के रहने वाले थे, जिनका एक सुसाइड नोट भी सामने आया है। इस सुसाइड नोट में उन्होंने किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए उनके हक के लिए आवाज बुलंद की है।

बाबा जी के सेवादार गुरमीत सिंह ने भी घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि बाबा जी के हरियाणा और पंजाब में ही नहीं, दुनियाभर में लाखों की संख्या में अनुयायी हैं।

सुइसाइड नोट का हिंदी अनुवाद

किसानों का दुख देखा है अपने हक के लिए

सड़कों पर उन्हें देखकर मुझे दुख हुआ है

सरकार इन्हें न्याय नहीं दे रही है

जो कि जुल्म है

जो जुल्म करता है वह पापी है

जुल्म सहना भी पाप है

किसी ने किसानों के हक के लिए तो किसी ने जुल्म के खिलाफ कुछ किया है

किसी ने पुरस्कार वापस करके अपना गुस्सा जताया है

किसानों के हक के लिए, सरकारी जुल्म के गुस्से के बीच सेवादार आत्मदाह करता है

यह जुल्म के खिलाफ आवाज है

यह किसानों के हक के लिए आवाज है

वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरुजी की फतेह

मंगलवार को दिल का दौरा पड़ने से गई थी किसान की जान

आपको बता दें कि इससे पहले कुंडली बॉर्डर पर भी आंदोलन के दौरान मंगलवार को एक किसान की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी। किसान नेताओं का कहना है कि लगभग हर रोज एक किसान की मौत हो रही है। कोरोना काल में कड़ाके की ठंड में खुले में इस तरह का प्रदर्शन काफी चुनौतीपूर्ण है। हालांकि किसानों के हौसले बुलंद हैं। उन्होंने कहा है कि वे 6 महीने तक टिकने की तैयारी के साथ आए हैं। आंदोलन में शामिल अब तक 11 से ज्यादा किसानों की मौत हो चुकी है।

बता दें कि सरकार भी किसान आंदोलन के कारण लगातार किसानों से संपर्क में है, जिससे ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार और किसानों के बीच बढ़ता विवाद जल्द ही थम जायेगा।

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