प्रदूषण की चादर में लिपटी दिखी दिल्ली, मना करने के बावजूद भी छूटे पटाखे, हालत नाजुक

 

नई दिल्ली: दिवाली से पहले ही सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी ने ये अपील की थी कि आप पटाखें ना छोड़े, क्योंकि ये आपके लिए ही नहीं पूरे वातावरण के लिए नुकसानदायक है, जिससे आपको सांस संबंधित कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि इसके बावजूद भी दिल्ली समेत उन सभी इलाकों में पटाखें छूटे जहां पटाखें छोड़ना मना ही था। जिसका नतीजा ये हुआ कि दिल्ली समेत वे सभी प्रदेश प्रदूषण की चादर में लिपटे में दिखें, जो पहले ही भयावह स्थिति से गुजर रहें थे।

आपको बता दें कि दिवाली की रात हुई आतिशबाजी के चलते दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) गंभीर श्रेणी में जा पहुंचा, जहां दिल्ली के कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 999 तक पहुंच गया। बता दें कि आनंद विहार में एयर क्वालिटी इंडेक्स 572, मंदिर मार्ग इलाके में 785, पंजाबी बाग में 544, द्वारका सेक्टर 18बी में 500, सोनिया विहार में 462, अमेरिकी दूतावास के आसपास 610, शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेज स्टडीज के आसपास 999, जहांगीरपुरी में 773, सत्यवती कॉलेज में 818 और बवाना इलाके में 623 दर्ज किया गया।

आपको बता दें कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सभी प्रकार के पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर 9 नवंबर की मध्यरात्रि से 30 नवंबर की मध्य रात्रि तक रोक लगा दी थी। एनजीटी ने रोक लगाते हुए कहा था कि, 'पटाखे उत्सव और खुशी के लिए जलाए जाते हैं लेकिन मौतों और बीमारियों का जश्न मनाने के लिए नहीं फोड़े जाते।'

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिवाली तक दिल्ली की वायु गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में ही बने रहने की आशंका जताई थी। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम में भी वायु गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में दर्ज की गई है।

गौरतलब है कि 0 और 50 के बीच AQI को 'अच्छा', 51 और 100 के बीच 'संतोषजनक', 101 और 200 के बीच 'मध्यम', 201 और 300 के बीच 'खराब', 301 और 400 के बीच 'बेहद खराब' और 401 से 500 के बीच 'गंभीर' श्रेणी में माना जाता है।

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