CBSE 12वीं की बोर्ड परीक्षा: बिना परीक्षा होंगे पास, रिजल्ट से नाखुश छात्रों के पास ये होगा विकल्प

 
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नई दिल्ली: सीबीएसई 12वीं की बोर्ड परीक्षा कैंसिल कर दी गई है। अब 12वीं क्लास के स्टूडेंट्स को समयबद्ध तरीके से परफार्मेंस के आधार पर पास किया जाएगा। कोविड के कारण अनिश्चित परिस्थितियों और विभिन्न स्टेकहोल्डर्स से प्राप्त फीडबैक के बाद यह निर्णय लिया गया कि इस वर्ष बारहवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। पीएम मोदी ने हाईलेवल मीटिंग की अध्यक्षता की है।

सीबीएसई के 12वीं की बोर्ड परीक्षा के बाद स्टूडेंट्स और उनके अभिभावकों के मन में एक सवाल और उठने लगा है कि एक साल बर्बाद हो गया। लेकिन इस पर भी बैठक में निर्णय लिया गया है। सूत्रों की मानें तो 12वीं बोर्ड में बैठने वाले स्टूडेंट्स को उनके पिछले तीन साल के परफार्मेंस पर प्रोमोट किया जाएगा। क्लास 9, 10 और 11 के एकेडमिक रिकार्ड और अन्य रिकार्ड्स को आधार बनाकर स्टूडेंट्स को प्रोमोट किया जा सकता है। हालांकि, इस बारे में एक गाइडलाइन जल्द जारी की जाएगी।

सीबीएसई से पूरे देश में 20300 स्कूल मान्यता प्राप्त हैं। इसमें जवाहर नवोदय विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय और निजी स्कूल भी शामिल हैं। इसके अलावा 28 देशों में करीब 220 सीबीएसई मान्यता प्राप्त इंटरनेशनल स्कूल हैं। दस लाख से अधिक स्टूडेंट्स इस बार 12वीं बोर्ड की परीक्षा में शामिल होने वाले थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा पर फैसला छात्रों के हित में लिया गया है। दरअसल, 12वीं बोर्ड परीक्षा कराने के लिए कुछ दिन पूर्व ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में सभी राज्यों से परीक्षा कराने के विकल्पों को लेकर रिपोर्ट मांगी गई थी। रिपोर्ट को पीएम मोदी के सामने पेश किया गया। इस रिपोर्ट के आधार पर पीएम मोदी ने मंगलवार को एक हाईलेवल मीटिंग बुलाई थी। इस बैठक में परीक्षा कैंसिल करने का निर्णय लिया गया।

पीएम मोदी ने कहा कि कोविड-19 ने अकादमिक कैलेंडर को प्रभावित किया है और बोर्ड परीक्षाओं का मुद्दा छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों में अत्यधिक चिंता पैदा कर रहा है, जिसे समाप्त किया जाना चाहिए। पीएम ने कहा कि देश भर में कोविड से विकट परिस्थिति है। देश में संख्या कम हो रही है और कुछ राज्य प्रभावी सूक्ष्म-नियंत्रण के माध्यम से स्थिति का प्रबंधन कर रहे हैं, कुछ राज्यों ने अभी भी लाॅकडाउन का विकल्प चुना है। ऐसे में छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर छात्र, अभिभावक और शिक्षक स्वाभाविक रूप से चिंतित हैं। पीएम ने कहा कि ऐसी तनावपूर्ण स्थिति में छात्रों को परीक्षा में बैठने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। प्रधान मंत्री ने जोर देकर कहा कि हमारे छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा का अत्यधिक महत्व है और इस पहलू पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज के समय में इस तरह की परीक्षाएं हमारे युवाओं को जोखिम में डालने का कारण नहीं हो सकती हैं।

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