कोरोना वायरस संक्रमण के बीच देश पर मंडराया एक और खतरा, तकरीबन 40,000 पक्षियों को मारने का आदेश

 

नई दिल्ली : कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव को लेकर सरकार लगातार प्रयासरत है, जिसे लेकर अब उसने देश के कई क्षेत्रों में कोरोना महामारी के टीके को लेकर ड्राई रन भी शुरू किया है। जिसका लक्ष्य पहले उन लोगों को टीका देने का है जिनके इस महामारी से अधिक खतरा है, जैसे स्वास्थ कर्मी, फ्रंट लाइन वर्कर और 50 से अधिक उम्र के व्यक्ति (बुजुर्ग लोग)।  

आपको बता दें कि अभी सरकार कोरोना महामारी से निपटने के लिए अपने पहले ही चरण में थीं कि एक और महामारी ने देश में अपना पैर फैलाना शुरू कर दिया है, जिसने अभी तक 170 से अधिक पक्षियों की जान ले ली। बता दें कि इस महामारी को लेकर विभिन्न राज्य सरकारों ने तकरीबन 40 हजार पक्षियों को मारने का आदेश दिया है।

हम बात कर रहें है एच5एन8 यानी बर्ड फ्लू की। आपको बता दें कि राजस्थान, केरल और मध्य प्रदेश के बाद अब हिमाचल प्रदेश में भी बर्ड फ्लू के मामले सामने आए हैं। अधिकारियों ने हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के पोंग बांध झील क्षेत्र में मृत पाए गए कुछ प्रवासी पक्षियों में बर्ड फ्लूकी पुष्टि की है। राजस्थान में भी कई जिलों में पक्षियों की मौत हुई है। राज्य के विभिन्न जिलों में सोमवार को 170 से अधिक पक्षियों की मौत के मामले सामने आए।

केरल में 40,000 पक्षियों को मारने का आदेश

केरल के कोट्टायम और अलप्पुझा जिलों के कुछ हिस्सों में बर्ड फ्लू के मामले सामने आने के बाद प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में और उसके आसपास एक किलोमीटर के दायरे में बत्तख, मुर्गियों और अन्य घरेलू पक्षियों को मारने का आदेश दिया है। अधिकारियों ने कहा कि एच5एन8 वायरस के प्रसार की रोकथाम के लिए करीब 40,000 पक्षियों को मारना पड़ेगा।

कोट्टायम जिला प्रशासन ने बताया कि नींदूर में एक बत्तख पालन केंद्र में बर्ड फ्लू पाया गया है और वहां करीब 1,500 बत्तख मर चुकी हैं। बर्ड फ्लू काफी संक्रामक बीमारी है और एच5एन1 वायरस के कारण पक्षियों के श्वसन तंत्र पर इसका असर पड़ता है। मानव भी इससे संक्रमित हो सकते हैं।

हिमाचल प्रदेश के पोंग बांध झील अभयारण्य में 1800 प्रवासी पक्षी मृत मिले

हिमाचल प्रदेश में पोंग बांध झील अभयारण्य में अब तक लगभग 1800 प्रवासी पक्षी मृत पाये गये हैं। केंद्र द्वारा दी गयी जानकारी का उल्लेख करते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अर्चना शर्मा ने कहा कि बरेली में भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान में मृत पक्षियों के नमूनों की जांच रिपोर्ट में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि उनका विभाग भोपाल स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डीजीज से इसकी पुष्टि का इंतजार कर रहा है क्योंकि इस बीमारी की जांच के लिये यह नोडल इकाई है। उन्होंने बताया कि जालंधर में उत्तरी क्षेत्र बीमारी जांच प्रयोगशाला ने भी पक्षियों के नमूनों में फ्लू की आशंका व्यक्त की है।

अंडे, मांस, चिकन आदि की बिक्री पर रोक

वहीं कांगड़ा के जिलाधिकारी राकेश प्रजापति ने जिले के फतेहपुर, देहरा, जवाली और इंदौरा उप मंडल में मुर्गी, बत्तख, हर प्रजाति की मछली और उससे संबंधित उत्पादों जैसे अंडे, मांस, चिकन आदि की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश के पोंग बांध वन्यजीव अभयारण्य में वन्यजीव कर्मियों ने पिछले सोमवार को फतेहपुर में सबसे पहले चार पक्षियों के मृत मिलने की सूचना दी थी। इसके बाद कुछ अन्य क्षेत्रों से भी मामले सामने आए।

केरल के कई जिलों में हाई अलर्ट जारी

केरल के दो जिलों से बर्ड फ्लू के मामले सामने आने के बाद राज्य में वन्य जीव, पशुपालन विभाग के कर्मचारियों को अलर्ट रहने को कहा गया है। आपको बता दें कि पिछले साल जनवरी के अंत तक एक लाख से ज्यादा प्रवासी पक्षी यहां आए थे और इस साल अब तक 50,000 से ज्यादा पक्षी पहुंच चुके हैं। अधिकारियों ने कहा कि बर्ड फ्लू के लिए निर्धारित निर्देशों के तहत मृत पक्षियों का निपटान कर दिया गया। वहीं राज्य में अन्य जलाशयों से पक्षियों की मौत की सूचना नहीं मिली है।

फिलहाल केरल में हालात काबू में है, इसके बावजूद प्रशासन ने जिलों में हाई अलर्ट जारी किया है क्योंकि यह वायरस मनुष्य को भी संक्रमित करने की क्षमता रखता है। बता दें कि केरल में वर्ष 2016 में बड़े पैमाने पर बर्ड फ्लू फैला था।

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