राज्य सरकार को चिकित्सा और इंजीनियरिंग शिक्षा तमिल में शुरू करनी चाहिए : अमित शाह

 
राज्य सरकार को चिकित्सा और इंजीनियरिंग शिक्षा तमिल में शुरू करनी चाहिए : अमित शाह
राज्य सरकार को चिकित्सा और इंजीनियरिंग शिक्षा तमिल में शुरू करनी चाहिए : अमित शाह राज्य सरकार को चिकित्सा और इंजीनियरिंग शिक्षा तमिल में शुरू करनी चाहिए : अमित शाहचेन्नई, 12 नवंबर (आईएएनएस)। मातृभाषा में चिकित्सा और इंजीनियरिंग शिक्षा की वकालत करते हुए, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को तमिलनाडु सरकार द्वारा इस तरह के पाठ्यक्रम शुरू करने को भाषा के लिए एक महान योगदान बताया।

सीमेंट प्रमुख इंडिया सीमेंट्स लिमिटेड के प्लेटिनम जुबिली समारोह में बोलते हुए, शाह ने कहा कि चिकित्सा और इंजीनियरिंग शिक्षा तमिल में होनी चाहिए और राज्य सरकार को इसे शुरू करना चाहिए।

गृह मंत्री शाह ने कहा कि छात्रों के लिए अपनी मातृभाषा में पढ़ाई करना आसान होगा और वे अपनी भाषा में अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) भी कर सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि तमिल सबसे पुरानी भाषा है और पूरे भारत को इस पर गर्व है।

रक्षा गलियारे जैसी विभिन्न परियोजनाओं को सूचीबद्ध करते हुए, शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और कहा कि पिछले आठ वर्षो के दौरान राज्य और केंद्रीय अनुदान के लिए कर हस्तांतरण कई गुना बढ़ गया है।

शाह के मुताबिक, अगर कोई कंपनी 75 साल से अस्तित्व में है तो यह दर्शाता है कि वह उस सेगमेंट में अग्रणी है।

कंपनी को शीर्ष पर ले जाने के लिए इंडिया सीमेंट के वाइस चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एन श्रीनिवासन की प्रशंसा करते हुए शाह ने यह भी कहा कि जब इंडिया सीमेंट्स के वाइस चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अखिल भारतीय चेस संघ (एआईसीएफ) का नेतृत्व कर रहे थे तो वह गुजरात राज्य चेस संघ के अध्यक्ष थे।

शाह गुजरात क्रिकेट संघ के पदाधिकारी भी थे जब श्रीनिवासन बीसीसीआई के अध्यक्ष थे।

आर्थिक मोर्चे पर, शाह ने कहा कि भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अच्छी तरह से बढ़ रहा है और मॉर्गन स्टेनली का हवाला दिया जिसने कहा था कि देश 2027 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

देश में राजनीतिक स्थिरता के साथ, शाह ने यह भी बताया कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि भारत अंधेरे क्षितिज में एक उज्‍जवल स्थान है।

तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि ने कहा कि 18वीं सदी तक भारत दुनिया का आर्थिक महाशक्ति था, इसका गौरवशाली इतिहास मिटा दिया गया।

इसका कारण यह था कि भारत में स्टील बनाना एक कॉटेज उद्योग की तरह था और उस समय वर्तमान आंध्र प्रदेश क्षेत्र में 10,000 से अधिक स्मेल्टर थे जो बेहतर गुणवत्ता वाले स्टील बना रहे थे।

रवि ने कहा कि शेफील्ड ने इस प्रक्रिया को सीखने के लिए अपनी टीम भारत भेजी थी। ब्रिटिश सरकार ने भारतीय उद्योग को खत्म कर दिया, फिर शेफील्ड समृद्ध हुआ।

रवि ने कहा कि पिछले 200 वर्षो में भारतीय उद्योग के साथ क्या हुआ था, इस पर विचार करना होगा। भारत की आजादी के बाद लाइसेंस परमिट राज ने विकास में बाधा डाली।

उनके मुताबिक मोदी सरकार में देश की अर्थव्यवस्था बढ़ रही है।

--आईएएनएस

एसकेके/एएनएम

From around the web