मध्य प्रदेश के भाजपा नेता पुत्रों की चुनाव पर नजर

 
मध्य प्रदेश के भाजपा नेता पुत्रों की चुनाव पर नजर
मध्य प्रदेश के भाजपा नेता पुत्रों की चुनाव पर नजरभोपाल, 13 नवंबर (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश में लगभग एक साल बाद विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। इन चुनावों को लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता अगर किसी में है तो वह भाजपा के नेता पुत्र हैं। यह नेता पुत्र अपनी बारी के इंतजार में है मगर पार्टी की गाइडलाइन ने उन्हें आगे बढ़ने से अब तक रोक रखा है। वे ठीक उस जहाज की तरह रनवे पर खड़े हैं जिसे टेकऑफ का इंतजार है।

भाजपा ने अब तक अघोषित एक गाइडलाइन पर काम किया है जिसके मुताबिक एक परिवार के दो सदस्यों को चुनावी मैदान में उतारने से रोका है। इस गाइडलाइन का असर मध्यप्रदेश में भी साफ तौर पर नजर आता है। यही कारण है कि कई दिग्गज नेताओं के बेटे चुनाव लड़ने की तैयारी पिछले चुनाव से कर रहे हैं मगर मौका नहीं मिला। इस बार फिर से उम्मीद लगाए हैं कि उन्हें चुनावी मैदान में जोर आजमाइश का मौका मिल सकता है।

राज्य में भाजपा के नेता पुत्रों पर गौर करें तो एक बात साफ तौर पर नजर आती है कि कई दिग्गज नेताओं के पुत्र अपने को चुनाव लड़ने के सक्षम पा रहे हैं, तो वहीं उनके पिता अपने बेटों की उम्मीदवारी की परोक्ष या अपरोक्ष रूप से पैरवी करते भी नजर आते हैं।

अगले विधानसभा के चुनाव में जिन नेताओं के पुत्र दावेदारी ठोक सकते हैं उनमें केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे देवेंद्र सिंह तोमर, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा के बेटे तुष्मुल झा, लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव के बेटे अभिषेक भार्गव, गौरीशंकर बिसेन की बेटी मौसम बिसेन, राज्य सरकार के मंत्री नरोत्तम मिश्रा के पुत्र सुकर्ण मिश्रा के नाम प्रमुख हैं।

भाजपा का एक बड़ा चुनावी मुद्दा वंशवाद रहा है और इसी को लेकर लगातार कांग्रेस को घेरने का सिलसिला भी जारी है। इसी बीच इन नेता पुत्रों की उम्मीदों को पंख लगाने का काम कर दिया है संसदीय बोर्ड के सदस्य सत्यनारायण जटिया के एक बयान ने। इस बयान में जटिया ने चुनाव जीतने वाले व्यक्ति को टिकट देने की बात कही है, साथ ही जोड़ा है कि नेता का पुत्र होना किसी का दोष नहीं है। योग्य नेताओं को टिकट मिलना चाहिए।

इससे पहले जटिया ने एक और बयान दिया था जिसमें पार्टी में उम्र का कोई क्राइटेरिया न होने की बात कही थी। साथ ही कहा था कि पार्टी सही समय पर सही कार्यकर्ता को जिम्मेदारी सौंपती है।

जटिया का बयान आने के बाद पार्टी के अंदरखाने भी कई तरह की चर्चाएं जोर पकड़ रही है। पिछले चुनाव में उम्र का हवाला देकर पूर्व मंत्री कुसुम महदेले का टिकट काटा गया था, अब उन्होंने जटिया के बयान के बाद सवाल उठाते हुए पूछा है कि उनका और अन्य नेताओं का फिर टिकट क्यों काटा गया था। क्या अब किसी नेता पुत्र को टिकट देने की तैयारी है।

राजनीतिक विष्लेषकों का मानना है कि भले ही योग्य उम्मीदवार को टिकट देने की चर्चाएं हवाओं में हों, मगर भाजपा फिलहाल वंशवाद के उस मुददे को छोड़ना नहीं चाहती जिसके जरिए उसने कांग्रेस को घेरा है। साथ ही भाजपा अपने को परिवारवाद के आरोपों के घेरे में लाकर नई मुसीबत भी नहीं बढ़ाएगी, फिर भी राजनेता अपनी अगली पीढ़ी को सक्रिय राजनीति में लाने की कवायद में पीछे रहेंगे यह भी नहीं माना जा सकता।

--आईएएनएस

एसएनपी/एसकेपी

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