फसल बीमा दावों के निपटारे में देरी को लेकर भाजपा और बीजद में रस्साकशी जारी

भुवनेश्वर, 17 नवंबर (आईएएनएस)। पदमपुर उपचुनाव से पहले ओडिशा में किसानों के फसल बीमा दावों के निपटान में देरी को लेकर बीजू जनता दल (बीजद) और भाजपा के बीच रस्साकशी चल रही है। दावे 2021 के खरीफ सीजन के दौरान सूखा से संबंधित हैं।
 
फसल बीमा दावों के निपटारे में देरी को लेकर भाजपा और बीजद में रस्साकशी जारी
फसल बीमा दावों के निपटारे में देरी को लेकर भाजपा और बीजद में रस्साकशी जारी भुवनेश्वर, 17 नवंबर (आईएएनएस)। पदमपुर उपचुनाव से पहले ओडिशा में किसानों के फसल बीमा दावों के निपटान में देरी को लेकर बीजू जनता दल (बीजद) और भाजपा के बीच रस्साकशी चल रही है। दावे 2021 के खरीफ सीजन के दौरान सूखा से संबंधित हैं।

पदमपुर उपचुनाव में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) और इनपुट सब्सिडी के तहत फसल बीमा वितरण में देरी एक प्रमुख मुद्दा बन गया है। क्षेत्र के सूखा प्रभावित किसान विरोध कर रहे हैं और सभी राजनीतिक दलों से अनुरोध किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती हैं, तब तक वे चुनाव प्रक्रिया में भाग नहीं लें।

किसानों को खुश करने के लिए ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 15 नवंबर को संकटग्रस्त किसानों के लिए 200 करोड़ रुपये की घोषणा की।

इनपुट सब्सिडी की घोषणा करते हुए पटनायक ने देरी के लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराया था। मुख्यमंत्री ने एक बयान में कहा था कि कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के तहत तकनीकी सलाहकार समिति (टीएसी) के साथ ओडिशा सरकार द्वारा निरंतर अनुवर्ती कार्रवाई और अनुपालन के बावजूद कई प्रभावित किसानों को अभी तक उनकी फसल बीमा बकाया राशि नहीं मिली है।

पटनायक के आरोप पर पलटवार करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने ओडिशा के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। पत्र में तोमर ने कहा कि पीएमएफबीवाई के कार्यान्वयन के लिए बोली लगाने, बीमा कंपनियों (आईसी) को जिलों के क्लस्टर आवंटित करने और प्रीमियम दरों के समझौते की जिम्मेदारी संशोधित परिचालन दिशानिर्देशों (आरओजी) के मानदंडों के अनुसार राज्य सरकार के पास निहित है।

उन्होंने कहा कि सीसीई एप के माध्यम से पारदर्शी फसल कटाई प्रयोग (सीसीई) कराने की जिम्मेदारी भी राज्य सरकार की है।

तोमर ने लिखा, केंद्र ने तुरंत इसका जवाब दिया और राज्य के अधिकारियों को सलाह दी कि वे एसटीएसी द्वारा उनकी जांच करवाएं, जिसे ओडिशा ने 2020 से दिशानिर्देशों का हिस्सा होने के बावजूद गठित नहीं किया था। एसटीएसी के आदेश के खिलाफ अपील प्राप्त हुई और मामले को उसके तार्किक निष्कर्ष पर ले जाया गया।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि उचित अनुवर्ती कार्रवाई के बाद विवादित जिलों के अधिकांश दावों का टीएसी में निपटारा कर दिया गया है और इस सप्ताह तक पूर्ण निपटान की उम्मीद है। नौ विवादित जिलों में 723 करोड़ रुपये कुल देय दावा है, जिसमें से 622 करोड़ रुपये का निपटारा हो चुका है।

बीजद सांसद सस्मित पात्रा ने मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि तोमर का पत्र त्रुटिपूर्ण, दोषपूर्ण है और विकृत तथ्यों और अर्धसत्य पर आधारित है। पत्र में सीएम के पत्र और राज्य के सहकारिता मंत्री की उनसे मुलाकात का जिक्र नहीं है।

पात्रा ने कहा, अब पदमपुर और ओडिशा के किसानों को पता है कि पीएमएफबीवाई जैसा कि नाम है, स्वाभाविक रूप से केंद्र का है और केवल केंद्र ही किसी भी दावे पर अंतिम निर्णय ले सकता है, जैसा कि आज केंद्र के पत्र में स्वीकार किया गया है और केवल वे ही बीमा कंपनियों को फसल बीमा भुगतान करने का निर्देश दे सकते हैं। जहां तक अंतिम निर्णय का संबंध है, इसमें राज्य की कोई भूमिका नहीं है।

--आईएएनएस

एसजीके/एएनएम

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