पाक पीएम इमरान को सताने लगा अपनी कुर्सी का डर, कभी भी हो सकते है शिकार

 

नई दिल्ली : पाकिस्तान लोकसभा चुनाव होने में तकरीबन 3 साल शेष है, उससे पहले ही पाक पीएम इमरान खान को अपनी कुर्सी का डर सताने लगा है। उन्हें डर है कि कहीं उनका ताज ना छिन जाएं। गौरतलब है कि एक चैनल को दिये इंटरव्यू में इमरान खान ने विपक्षियों पर बड़ा हमला किया है, और उनपर एक लोकतांत्रिक सरकार गिराने के षड्यंत्र का दोष मढ़ा है।

इमरान ने इंटरव्यू में दावा किया कि सरकार को गिराने के लिए विपक्षी पार्टियां सेना पर दबाव डाल रही हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टी के नेताओं का आरोप है कि वे कठपुतली हैं और इसलिए विपक्ष इस्टैब्लिश्मेन्ट से बात करना चाहता है, इसका मतलब यह हुआ कि वे सरकार गिराने के लिए सेना पर दबाव डालना चाहते हैं। यह उनका लोकतांत्रिक आंदोलन है। इमरान खान ने यह भी कहा कि पूर्व पीएम नवाज शरीफ ने जिस तरीके से पाकिस्तान की टॉप मिलिट्री लीडरशिप पर जुबानी हमला बोला है, इससे सेना के भीतर काफी गुस्सा है।

खान ने बताया कि लंदन से सरकार विरोधी रैलियों को संबोधित करते हुए नवाज शरीफ ने कहा था कि 2017 में उनकी सरकार गिराने के लिए सेना प्रमुख जनरल बाजवा और आईएसआई प्रमुख जनरल फैज हमीद ने योजना बनाई थी और 2018 के चुनाव को भी प्रभावित किया था, ताकि इमरान खान को कुर्सी पर बैठाया जा सके।

पाक पीएम ने कहा कि वे जनरल बाजवा की तारीफ करते हैं क्योंकि उन्होंने लोकतंत्र की खातिर संयम रखा है। अगर बाजवा की जगह कोई और होता तो बड़ी प्रतिक्रिया हुई होती। उन्होंने कहा कि चूंकि विपक्ष को यह समझ आ गया है कि वे उन्हें (इमरान खान को) कुर्सी से हटा नहीं सकते, इसलिए वे पाकिस्तान की सेना से अपील कर रहे हैं और चुनी हुई सरकार को गिराने के लिए कह रहे हैं। यहां ऐसी गतिवधियां होने पर आर्टिकल 6 लागू होता है, जो देशद्रोह का मामला बनता है।

इमरान ने कहा कि विपक्ष की मांग है कि अगर सेना और आईएसआई चीफ मुझे नहीं हटाते हैं तो सेना को अपने शीर्ष अधिकारियों को ही पद से हटा देना चाहिए। जबकि पाकिस्तान की सेना, सरकार का हिस्सा है। पाकिस्तान की सेना उनके ऊपर नहीं, नीचे आती है।

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