Navratri 2020 : मां ब्रह्मचारिणी की ऐसे करें पूजन, जानिए पूजा विधि और मंत्र, बरसेगी माता की कृपा

 

नई दिल्ली : मां शैलपुत्री के पूजन के साथ ही शारदीय नवरात्र की शुरूआत हो चुंकी है, जिसे लेकर भक्तजनों में काफी हर्षोल्लास है। आपको बता दें कि पंचांग के अनुसार 18 अक्टूबर 2020 को आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है, इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। बता दें कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा तप, शक्ति, त्याग, सदाचार, संयम और वैराग्य में वृद्धि करने के साथ ही शत्रुओं का भी नाश करती है।

मां ब्रह्मचारिणी पूजा विधि :- मां ब्रह्मचारणी की पूजा में पुष्प, अक्षत, रोली, चंदन का प्रयोग किया जाता है। पूजन आरंभ करने से पहले मां ब्रह्मचारिणी को दूध, दही, शर्करा, घृत और शहद से स्नान कराये। इसके उपरांत मां ब्रह्मचारणी को प्रसाद अर्पित करें। इस क्रिया को पूरा करने के बाद आचमन और फिर पान, सुपारी भेंट करनी चाहिए। इसके बाद स्थापित कलश, नवग्रह, दशदिक्पाल, नगर देवता और ग्राम देवता की पूजा करें।

मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र:-

या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

दधाना कर मद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।

देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।

2. ब्रह्मचारयितुम शीलम यस्या सा ब्रह्मचारिणी.

सच्चीदानन्द सुशीला च विश्वरूपा नमोस्तुते..

3. ओम देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

मां ब्रह्मचारिणी का स्रोत पाठ :-

तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्।

ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥

शंकरप्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी।

शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणीप्रणमाम्यहम्॥

मां ब्रह्मचारिणी का कवच :-

त्रिपुरा में हृदयं पातु ललाटे पातु शंकरभामिनी।

अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्धरी च कपोलो॥

पंचदशी कण्ठे पातुमध्यदेशे पातुमहेश्वरी॥

षोडशी सदापातु नाभो गृहो च पादयो।

अंग प्रत्यंग सतत पातु ब्रह्मचारिणी।

मां ब्रह्मचारिणी की आरती:

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।

जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।

ब्रह्मा जी के मन भाती हो।

ज्ञान सभी को सिखलाती हो।

ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।

जिसको जपे सकल संसारा।

जय गायत्री वेद की माता।

जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।

कमी कोई रहने न पाए।

कोई भी दुख सहने न पाए।

उसकी विरति रहे ठिकाने।

जो ​तेरी महिमा को जाने।

रुद्राक्ष की माला ले कर।

जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।

आलस छोड़ करे गुणगाना।

मां तुम उसको सुख पहुंचाना।

ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।

पूर्ण करो सब मेरे काम।

भक्त तेरे चरणों का पुजारी।

रखना लाज मेरी महतारी।

आपको बता दें कि मां ब्रह्मचारणी की पूजा से मंगल ग्रह की अशुभता को दूर करने में मदद मिलती है। ऐसी मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी मंगल ग्रह को नियंत्रित करती हैं। इसलिए जिन लोगों की जन्म कुंडली में मंगल अशुभ है उन्हें मां ब्रह्मचारणी की पूजा अवश्य करनी चाहिए।

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