Narak Chaturdashi 2020: नरक चतुर्दशी का क्या है महत्व, इस दिन क्यों होती है इन 6 देवों की पूजा?

 

रिपोर्ट- रितिका आर्या

दिवाली के साथ ही 5 तरह के उत्सव मनाए जाते हैं जिसमें धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दिवाली, गोवर्धन और भाई दूज है। इन त्योहारों की शुरुआत धनतेरस के साथ ही शुरूआत हो जाती है और भाई दूज पर ये खत्म होता है। नरक चतुर्दशी को रूप चौदस, काली चौदस और छोटी दीपावली के नाम से भी जाना जाता है। साल में एक बार आने वाले इस शुभ अवसर पर 6 देवों की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है इन छह देवों की पूजा से मनुष्य के सारे कष्ट दूर होते हैं तो आइए आपको बताते हैं नर्क चतुर्दशी के दिन क्या करना आपके लिए फायदेमंद होगा।

जरूर करें यम की पूजा

नर्क चतुर्दशी के दिन यम की पूजा की जाती है। रात के समय इस दिन यम की पूजा के लिए दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं। एक पुराने दीपक में सरसों का तेल और पांच अन्न के दाने डालकर इस दीपक को घर के कोने में जलाएं। इसे यम दिपक भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है इस दिन यम की पुजा करने से अकाल मृत्यु का खतरा कम हो जाता है।

मां काली की पूजा

नर्क चतुर्दशी के दिन मां काली की पूजा करने का विधान है। इसके लिए सुबह तेल में स्नान करके काली की पूजा करें। ये पूजा आधी रात में जाती है। ऐसा माना जाता है इस दिन मां काली की पूजा करने से सभी दुखों का खात्मा होता है।

श्रीकृष्‍ण पूजा

मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन नरकासुर राक्षस का वध कर उसके कारागार से 16,000 कन्याओं को मुक्त कराया था। इसीलिए इस दिन श्रीकृष्ण की भी पूजा की जाती है।

शिव पूजा

नरक चतुर्दशी के दिन के दिन शिव चतुर्दशी (Shiva Chaturdashi) भी मनाई जाती है। इस दिन शंकर भगवान को पंचामृत अर्पित करने के साथ माता पार्वती की भी विशेष पूजा की जाती है।

हनुमान पूजा

मान्यताओं के अनुसार इस दिन हनुमान जयंती भी मनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन हनुमान पूजा करने से सभी तरह का संकट टल जाते हैं।

वामन पूजा

दक्षिण भारत में नरक चतुर्दशी के दिन वामन पूजा (Vamana Puja) का भी प्रचलन है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन राजा बलि को भगवान विष्णु ने वामन अवतार में हर साल उनके यहां पहुंचने का आशीर्वाद दिया था।

नरक चतुर्दशी कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली का पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल नरक चतुर्दशी का त्योहार 14 नवंबर 2020 (शनिवार) को मनाया जाएगा।

शुभ मुहूर्त

चतुर्दशी तिथि प्रारंभ- 13 नवंबर 2020 को शाम 06.01 बजे से,

चतुर्दशी तिथि समाप्त- 14 नवंबर 2020 की दोपहर 02.20 बजे तक।

अभ्यंग स्नान मुहूर्त- 14 नवंबर 2020 सुबह 05.23 बजे से सुबह 06.43 बजे तक।

पूजा विधि

  • नरक चतुर्दशी की सुबह शरीर की तिल के तेल से मालिश करना शुभ माना जाता है, इसलिए स्नान से पहले अपने शरीर की मालिश जरूर करें।
  • स्नान के बाद दक्षिण दिशा में हाथ जोड़कर यमराज को प्रणाम करना चाहिए. मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है।
  • शाम के समय देवी-देवताओं की पूजा के बाद दीपक जलाकर घर की चौखट के दोनों तरफ रखना चाहिए और यमराज के नाम दीपदान करना चाहिए।
  • यमराज के लिए और अपने पितरों के लिए दक्षिण दिशा में दीपक जलाना चाहिए, फिर यम देव और पितरों से अपनी गलतियों के क्षमा याचना करनी चाहिए।
  • मान्यता है कि नरक चतुर्दशी के दिन आधी रात में घर में पड़े बेकार सामान को बाहर फेंक देना चाहिए, क्योंकि अगले दिन दीपावली पर देवी लक्ष्मी घर में प्रवेश करती हैं, इसलिए घर की सफाई उचित तरीके से की जानी चाहिए।
  • नरक चतुर्दशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विधान भी है। कहा जाता कि इस दिन श्रीकृष्ण की उपासना से सौंदर्य की प्राप्ति होती है, इसलिए इसे रूप चौदस भी कहा जाता है।

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