चुनाव में जीत के लिए लगाने होती है इस दरबार में हाजिरी

 

नई दिल्ली : 2020 का साल अपने अंतिम चरण की ओर है, जिसके गुजरने में तकरीबन 3 माह का समय शेष है। लेकिन यह साल अनेकों विपदाओं को लेकर हमेशा याद किया जायेगा, चाहे वह बेरोजगारी हो या कोरोना महामारी। आपको बता दें कि इसी साल में बिहार विधानसभा के चुनाव होने है, जिनके तिथि की घोषणा अभी नहीं हुई है। वहीं इस चुनाव जीत को लेकर मां दुर्गा के इस मंदिर के बाहर नेताओं का तांता लग गया है। बता दें कि यह पहली बार नहीं है, जब मां के इस मंदिर के सामने नेताओं की भीड़ लगी हो, इससे पहले भी अक्सर नेतागण मां के मंदिर के सामने अपने मुराद को लेकर आते रहे है।

हम बात कर रहे है मां दुर्गा के अष्टम स्वरूप माता बगलामुखी की, इनका ध्यान बगुला पक्षी की तरह एकाग्र है। विशेष रूप से मां का पूजन शत्रु पर विजय, राजनीतिक जीत, बच्चों की शिक्षा, मुकदमों में विजय के लिए किया जाता है। इनके पूजन से भक्त को उच्च पद प्राप्त होता है।

मां पीतांबरा की असीम अराधना से उच्च पदस्थ अधिकारी, नेता, अभिनेता विजयश्री प्राप्त करते हैं। सामान्य से उच्च पदस्थ व्यक्ति इनका स्मरण करने पर शत्रु का विनाश कर देता है। यहां शत्रु के विनाश से तात्पर्य उसकी दुर्बुद्धि का विनाश कर उसे सद्पुरुष बनाने से है। आपको बता दें कि नवरात्र की पंचमी से ही महाविद्या की पूजार्चना का क्रम प्रारम्भ हो जाता है।

यह देवी राजयोग की देवी हैं। सत्ता-असत्ता इनके अधीन हैं। इसलिए नेतागण भी इनकी शरण में जाते हैं। देवी कल्याण की देवी हैं। इनको अन्याय पसंद नहीं। यह न्याय की देवी हैं। अधर्म, पाप और अनुचित कामना इनको पसंद नहीं। कैसा भी संकट आये, यह उनको दूर कर देती हैं। अन्य देवियों से इनकी आराधना का विधान अलग है। इनकी मानसिक पूजा है। यंत्र, तंत्र और मंत्र तीनों ही रूपों में इनकी पूजा की जाती है।

वैसे तो आप सभी ये जानते है कि मंगलवार को केवल हनुमान जी की ही पूजा होती है, लेकिन आपको हम बता दें कि मंगलवार को मां पितांबरा की भी पूजा की जाती है, मंगल इन्हें प्रिय है। यदि आप किसी मुकदमे में फंसे हैं, शत्रुओं से त्रस्त हैं, घर में कोई मुश्किल है और उसका निदान नहीं हो रहा है या अपनी संतान को लेकर चिंतित हैं तो मां पीतांबरा आपका कल्याण करेंगी।

मंगलवार को करें पूजा

मंगलवार चतुर्दशी बीर रात्रि विख्यात

कुल नक्षत्र मकार में प्रगटि बगलामां।

महाविद्या में देवी आठवां स्वरूप हैं। इनकी आराधना रात्रिकालीन है। यदि ठीक नौ बजे का समय हो तो और उचित। बगुलामुखी की आराधना विधि-विधान जानकर ही करनी चाहिए। देवी का किन स्वरूपों में ध्यान करना चाहिए और कैसे पूजा करनी चाहिए, इसका विधान इस प्रकार है..

अनिवार्य चीजें

1.       पीले वस्त्र पहनें

2.       आसन पीला हो

3.       हल्दी की माला से जाप करें

4.       पीली किशमिश या पीला हलवा का भोग लगाएं

5.       तीन और नौ का अंक देवी को प्रिय है।

6.       ग्रहस्थ रात को नौ बजे पूजा करें

कैसे करें पूजा

नौ लोंग के जोड़े लें ( यानी 18)। किसी थाली में या मिट्टी के सकोरे में हल्दी से त्रिभुज बनाएं। उस त्रिभुज में एक गोला बनाकर उसमें पीली सरसों भरें। फिर कपूर रखकर एक-एक मंत्र जपते जाएं और एक लोंग का जोड़ा रखते जाएं। पूरी लोंग जलने पर ही दूसरा जोड़ा रखें।

देवी का मंत्र बड़ा है लेकिन बीज मंत्र सरल है....ऊं ह्लीं ह्लीं ऊं।

इसको पढ़ते जाएं और देवी का स्तवन करते रहें। 

ऊं ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय, जिहवां कीलय बुद्धिं विनाशय हल्रीं ऊं स्वाहा’ ( इस संपूर्ण मंत्र का भी जाप कर सकते हैं)  

साधारण उपाय

वशीकरण-स्तंभन

मधु. शर्करा युक्त तिलों से होम करने पर मनुष्य वश में होते है।

मधु. घृत तथा शर्करा युक्त लवण से होम करने पर आकर्षण होता है।

हरिताल, नमक तथा हल्दी से होम करने पर शत्रुओं का स्तम्भन होता है।

भय नाशक मंत्र

ॐ ह्लीं ह्लीं ह्लीं बगले सर्व भयं हन

पीले रंग के वस्त्र और हल्दी की गांठें देवी को अर्पित करें।

मुकदमा हो तो यह करें

ॐ बगलामुखी देव्यै ह्लीं ह्रीं क्लीं शत्रु नाशं कुरु

-नारियल काले वस्त्र में लपेट कर बगलामुखी देवी को अर्पित करें

-मंत्र जाप के समय पश्चिम कि ओर मुख रखें

-मंदिर में 9 नीबू की माला चढाएं

प्रतियोगी परीक्षा में सफलता

नौकरी और प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए, देवी भगवती को पीले कपड़े में नारियल लपेटकर चढ़ाएं और यह जाप करें..

ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं बगामुखी देव्यै ह्लीं साफल्यं देहि देहि स्वाहा:

-बेसन का हलवा प्रसाद रूप में बनाकर चढ़ाएं।

घर-संतान की रक्षा के लिए

बच्चों और घर-परिवार की सुरक्षा के लिए मंत्र पढ़ें

ॐ हं ह्लीं बगलामुखी देव्यै कुमारं रक्ष रक्ष

-देवी माँ को गुड़ की बनी मीठी रोटी का भोग लगायें।

दो नारियल देवी माँ को अर्पित करें।

सुरक्षा कवच का मंत्र

प्रतिदिन बगुलामुखी कवच पढ़ें।

ॐ हां हां हां ह्लीं बज्र कवचाय हुम

पान मिठाई फल सहित पंचमेवा अर्पित करें।

मां पीतांबरा देवी का आर्विभाव

अगर हम मां के आविर्भाव की बात करें तो सांख्यान तंत्र और मेरू तंत्र में दो कथाओं के अनुसार क्षीर सागर में विश्राम करते हुए भगवान लक्ष्मीनारायण विष्णु जी को जब संसार में अपने भक्तों की रक्षा की चिंता हुई। तब उन्होंने कठोर तपस्या की, जिससे सौराष्ट्र के पीत सरोवर में महात्रिपुर सुंदरी के तेज से पीतांबरा देवी का आर्विभाव वीर रात्रि के रूप में हुआ।

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