जानिए कब है धनतेरस और कैसे करें पूजा, पूजन करने की शुभ विधि 

 

नई दिल्ली : हर साल धनतेरस की पूजा दिपावली से दो दिन पहले मनाया जाता है, जिसे लेकर लोग भी निश्चिंत रहते है कि यह पर्व दिपावली से दो दिन पहले ही मनाया जायेगा। हालांकि इस बार धनतेरस दिपावली के दो दिन पहले नहीं, बल्कि एक दिन पहले मनाया जायेगा। क्योंकि इस बार 13 नवंबर, शुक्रवार को कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है और इस तिथि को ही धनतेरस हर्षोल्लास के साथ मनाया जायेगा।

धनतेरस को लेकर ज्योतिषाचार्य अमित द्विवेदी ने बताया कि त्रयोदशी तिथि 12 नवंबर गुरुवार को रात्रि 9:30 पर लगेगी जो कि 13 नवंबर, शुक्रवार को शाम 5:59 तक रहेगी। ऐसी मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय धन्‍वंतरि अमृत का कलश लेकर अवतरित हुए थे। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद के प्रवर्तक तथा श्री हरि विष्णु के अवतार के रूप में धार्मिक मान्यता मिली हुई है। इस दिन इनकी पूजा अर्चना से आरोग्य सुख तथा उत्तम स्वास्थ्य बना रहता है।

आपको बता दें कि बर्तन के अतिरिक्त नए वस्त्र, रजत के आभूषण व सोने-चांदी के सिक्के एवं अन्य मांगलिक वस्तुएं खरीदना शुभ फलदाई माना गया है। इस दिन बर्तन खरीदने से अधिक लाभ एवं लक्ष्मी का स्थायी निवास मिलता है। वहीं व्यवसायी एवं व्यापारी वर्ग शुभ मुहूर्त में बहीखाता एवं प्रयोग में आने वाली अन्य वस्तुएं भी खरीदते हैं। बता दें किदं कै कि थि को ही धनतेरस हर्षोल्लास के साथ मनाया जायेगा। ार को कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी मनाया जायेगा। हालांकि इस  धनतेरस को संपूर्ण दिन में अभिजीत मुहूर्त 11:36 से 12:24 तक सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त माना गया है।

पूजा का सर्वोत्तम समय वृषभ लग्न शाम 5:16 से रात्रि 7:13 तक रहेगा। धनतेरस के दिन शुरू किए गए शुभ कार्यों में अच्छी सफलता व स्थाई लाभ की प्राप्ति होती है। घर एवं कार्य स्थल को आलोकित या प्रकाश में रखना चाहिए। धनतेरस का पर्व अपने पारंपरिक परंपरा के अब के साथ अवश्य मनाना चाहिए।

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