रावण के वध के बाद मंदोदरी ने आखिर क्यों की विभीषण से शादी, पहले ठुकरा दिया था प्रस्ताव

 

नई दिल्ली: प्रभु श्री राम लंका से अयोध्या आने को तैयार है, अयोध्या ही नहीं पूरा भारतवर्ष उनके स्वागत के लिए तैयार है। चारों तरफ दीपों की जगमगाहट से इस काले अंधियारे में भी रौशनी ही रौशनी दिखाई दे रही है। आपको बता दें कि इस साल दीपावली 14 नवंबर को है। जिस दिन बड़े-बुजुर्ग अपने बच्चों को प्रभु श्री राम की कहानी सुनाते है, जिससे उनमें भी प्रभु श्री राम के कुछ गुण आ सकें।

एक ऐसा ही किस्सा लंकापति रावण की पत्नी मंदोदरी का है, जिन्होंने रावण के वध के बाद विभीषण से शादी कर ली थी। लेकिन उन्होंने पहले इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था, फिर उन्होंने शादी की। पुराणों की मानें तो मंदोदरी पूर्व जन्म में एक मेंढ़की थी, जिसने ऋषियों की जान बचाने के लिए खुद की जान दाव पर लगा दी। एक समय की बात है। सप्तऋषि अपने आश्रम में खीर बना रहे थे। उसी दौरान खीर में एक सांप गिर गया, जिसे मेंढ़की मंदोदरी ने देख लिया। ऋषियों का जीवन बचाने के लिए वह भी गर्म खीर में कूद गई और  अपनी जान दे दी।

मेंढ़की को खीर में कूदते देख एक पल तो ऋषियों को गुस्सा आया, वे गुस्से में आकर खीर से भरा पतीला फेंक रहे थे। उसी दौरान उनकी नजर खीर के अंदर मरे हुए सांप पर पड़ा, वे समझ गए कि मेंढकी  ने उनका जीवन बचाने के लिए अपने प्राण त्यागा। इसके बाद उन्होंने मंदोदरी को वापस जीवन दान देकर एक कन्या का रूप दिया। तब से कहा जाता हैं कि मंदोदरी सप्तऋषियों की संतान थी। वह कन्या सप्तऋषियों के साथ ही रहने लगी। कुछ समय बाद ऋषियों ने सोचा कि एक कन्या का ऋषियों के पास क्या काम। कहीं कोई उनपर लांछन न लगा दे।

इसके बाद सप्तऋषियों ने महान ऋषि कश्यप के पुत्र मायासुर को बुलाया और कहा कि इस कन्या को तुम अपने पास रखकर देखभाल करो। मायासुर ने वचन दिया कि मंदोदरी को वे अपनी पुत्री ही समझेंगे और उसका पालन करेंगे। बाद में मंदोदरी की शादी लंकापति रावण के साथ हो गई। इस शादी से मंदोदरी को दो पुत्र मेघनाद और अक्षय प्राप्त हुए।

आपको बता दें कि मंदोदरी रावण की पत्नी के साथ-साथ उनकी बेहतरीन सलाहकार भी थी। सीता के अपहरण के बाद मंदोदरी ने कई बार रावण को समझाया कि वह सीता को वापस कर दे। इस तरह दूसरे की पत्नी का अपहरण करना लंकेशपति को शोभा नहीं देता है। लेकिन अहंकार और बदले की भावना में चूर रावण ने उनकी एक नहीं सुनी और युद्ध में भगवान श्रीराम के हाथों मारा गया।

रावण के वध के बाद प्रभु श्रीराम ने विभीषण को लंका का नया राजा बनाने की सलाह दी और उन्हें मंदोदरी से विवाह करने का प्रस्ताव दिया, जिसे मंदोदरी ने ठुकरा दिया। आपको बता दें कि इस घटना के बाद मंदोदरी ने खुद को राज्य से अलग कर लिया। हालांकि कुछ समय बाद वे विभीषण से विवाह करने पर सहमत हो गईं।

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