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आखिर मायावती को अब भी याद है वो ‘काली रात’

नई दिल्ली: आगामी लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति तेजी से करवट ले रही है। पिछले काफी दिनों से जारी चर्चाओं के बीच अखिलेश यादव और मायावती ने कांग्रेस को अपने हाल पर छोड़ते हुए बीजेपी के खिलाफ गठबंधन का औपचारिक ऐलान कर दिया है। एक समय में समाजवादी पार्टी की धुर-विरोधी रही बसपा प्रमुख मायवती ने शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश के साथ साझे तौर पर मीडिया को संबोधित करते हुए गठबंधन का ऐलान किया।

अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन का ऐलान करते हुए मायावती ने कहा कि, ये गठबंधन मोदी-शाह की नींद उड़ाने वाली है। हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मायावती ने कुछ ऐसी बात भी कही जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि समाजवादी पार्टी से गठबंधन का फैसला उनके लिए कितना मुश्किल रहा।

अखिलेश यादव के साथ एक ही मंच से मीडिया को संबोधित करते हुए मायवाती ने एक बार फिर से अपने साथ घटी एक बड़ी घटना (गेस्ट हाउस कांड) जिक्र करते हुए कहा कि बीजेपी को हराने के लिए उन्होंने गेस्ट हाउस कांड को भूलाकर समाजवादी पार्टी से गठबंधन का फैसला किया है।

मायावती ने कहा कि, देशहित में हमने लखनऊ गेस्ट हाउस कांड को किनारे रखा है। उन्होंने कहा कि, बीजेपी घोर जातिवादी, सांप्रदायिक है। साथ ही उन्होंने सपा के साथ अपने पुराने रिश्तों को याद करते हुए कहा कि, साल 1993 में भी हमारा गठबंधन हुआ था लेकिन कुछ कारणों से हमें अलग होना पड़ा था।

आपको बता दें कि मायवती यहां जिसे ‘कुछ कारण’ बता रही हैं असल मे वो अपने समय में एक बड़ा कांड था। दरअशल, साल 1993 में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी ने एक साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया और चुनाव में अच्छा प्रदर्शन कर दिसंबर 1993 में उत्तर प्रदेश में गठबंधन की सरकार बनी थी।

लेकिन इसके कुछ समय बाद जून 1995 में मायावती ने गठबंधन से समर्थन वापस ले लिया और मुलायम सिंह यादव की पार्टी अल्प मत की स्थिति में आ गई। जबकि इधर सपा से नाता तोड़कर मायावती ने सत्ता के लिए भाजपा का दामन थाम लिया था। वहीं मायावती के इस फैसले नाराज सपा समर्थकों की भीड़ ने उस गेस्ट हाउस पर हमला कर दिया था, जहां मायवती ठहरी हुई थीं।

इस घटना को याद करते हुए मायवती भी कई बार समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए कह चुकी हैं कि ये गेस्ट हाउस उनकी हत्य के लिए बनाई गई योजना थी। हालांकि अब राजनीति के बदलते दौर में दोनों दलों ने अपने पुराने विवाद भूला कर नये रिश्तों को नया नाम दिया है।

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