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स्टीफन हॉकिंग ने किया था खुलासा, कैसे होगा हमारी दुनिया का अंत

नई दिल्ली:- स्टीफन हॉकिंग ने किया दुनिया के अनगिनत रहस्य का खुलासा हम विज्ञान और तकनीकि के क्षेत्र में जिस उन्नति पर आज इतना इतरा रहे है। क्या वही एक दिन पुरी दुनिया को खत्म कर देगी? मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का कुछ ऐसा ही आकलन था। उनका कहना था, कि कातिल रोबोट और साइबर हमले से संसार का नाश हो जायेगा, मानव और दुनिया के लिए भविष्य के बङे खतरों को पहचान करने और अस्तित्व को बचाये रखने के तरीको को तलाशने में दुनिया के शीर्ष शोधकर्ता जुट गये है।

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इस शोध के लिए ब्रिटेन में the ceramic center for the study of existential risk यानि सीएसईआर सोसाइटी का गठन किया गया है। जिसका नेतृत्व खगोलविद मार्टिन विस कर रहे है, इस सोसाइटी में ब्रिटेन कि कुछ ऐसी हस्तियां भी जुटी है, जिनके दिमाग को सुपर विंग कहा जाता है। इसमें प्रसिद्ध भौतिक शास्त्री स्टीफन हॉकिंग और सरकार के पूर्व मुख्य वौज्ञानिक रार्बट मे आदि शामिल थे।

सीएससीआर जो जोखिमों कि सुची तैयार करेगी। जिनसे मानव जाति का पुरी तरह से सफाया हो सकता है। जैसे आतंकवादीयों के द्वारा इंटरनेट के माध्यम से किया गया साइबर हमला धातक बिमारियां,और कातिल रोबोट, सोसाइटी कि अगुवाई करने वाले रिच और प्रकृतिक आपदाओं जैसी छोटे तरिका का पृथ्वी से टकराना,मौसम में भारी बदलाव,और महामारी आदि का अध्ययन करेगें।

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हालांकि उनका मानना है कि मानव अस्तित्व को सबसे बङा खतरा प्रकृतिक से नहीं है बल्कि खुद इंसानों से ही है, उन्होने बताया ये सोसाइटी जब खतरों की पहचान कर लेगी। तो उसके बाद मानव अस्तित्व को बनाये रखने वाली भविष्य के दिर्घकालिक तरीके इजात करेगी। इस प्रोजक्ट के सह संस्थापक टेनटेलिय और क्रैबिज के प्रोफेसर हुकप्राइज है। इनका मानना है,कि कई वैज्ञानिक मानव प्रौद्योगिकीय क्षेत्र में हो रहे बेतहासा विकास से बेहद चिंतित है। उनका मानना है ये मानव अस्तित्व के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

सोसाइटी के एक सदस्य डेविडहैजल्ट ने सावधान करते हुए कहां हम ऊर्जा से लेकर भोजन जैसी सभी चीझों की आपूर्ति के लिए परसपर संबधित व्यवस्था का उपयोग करते है । इनमें किन्ही कारणों से दिक्कत आने से पुरी व्यवस्था बिगङ सकती है,ये दंगा,युद्ध,आपदा कुछ भी हो सकता है। उन्होने कहां हम तकनीकी खतरों से पुरी तरह व़ाकिफ नही हैं, तकनीकी पर हमारी जरुरत से ज्यादा निर्भता हमें कमजोर बना रही हैं। शोधकर्ताओं ने कहां कि ऊर्जा सुरक्षा भी बङा मसला है, हम ज्यादतर पेट्रोलियम पर्दाथ विदेशों से आयात करते है, इसलिए इन संसाधनो पर भविष्य मे युद्ध से इंकार नही किया जा सकता है।

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