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लॉकडाउन : वर्क फ्रॉम होम में रूलाती नेट, हुई बद से बदतर

रिपोर्ट : ए.के.रंजन

नई दिल्ली : देश में फैले कोरोना वायरस को लेकर पीएम मोदी ने लॉकडाउन जारी किया, जिससे इस वायरस को रोका जा सकें। ऑफिस में काम करने वाले लोगों को वर्क फ्रॉम होम करने की घोषणा की जिससे वो अपने काम को अंजाम घर बैठे दे सकें। लेकिन इस 21 दिन के लॉकडाउन में इंटरनेट ने लोगों को इतना रूलाया कि वे समझ नहीं पा रहें की वो क्या करें। अगर काम नहीं होगी तो कंपनी सैलरी नहीं देगी, अगर सैलरी नहीं मिलेगी तो कंपनी छुट्टी दे देगी। फिर वे ऐसी परिस्थिति में कैसे रहेंगे। वहीं गाजीयाबाद के खोड़ा कॉलोनी में रहने वाले विवेकानंद राय ने कहा कि उन्होंने कुछ दिनों पहले फोन-पे से रिचार्ज किया था, पैसे तो कट गये लेकिन रिचार्ज नहीं हुआ और नहीं उनका पैसा आया, जिससे डिजिटल पेमेंट करने में भी काफी असुविधा हो रहीं है। यहीं हाल अन्य जगहों का भी है।

आपको बता दें कि देश में जारी लॉकडाउन के बाद एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया और रिलायंस जैसे कई कंपनियों का नेट बहुत स्लो चलने के कारण वर्क फ्रॉम होम करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे वे अपने काम को पूरा नहीं कर पा रहे। उनका कहना है कि कंपनी इस लॉकडाउन में दुगुणा डाटा दे रही है, लेकिन ये सुविधा कोई काम नहीं आ रहा। क्योंकि नेट इतना धीरे चल रहा है की काम ही नहीं हो पा रहा।

वहीं गाजियाबाद के रोहित वर्मा ने कहा कि वो एयरटेल और वोडाफोन का सीम इस्तेमाल कर रहे है, लेकिन दोनों में से किसी भी कंपनी का नेट सहीं से काम नहीं कर रहा, जबकि उसके पापा रिलायंस का सीम इस्तेमाल कर रहें है, उस कंपनी का भी नेट बहुत धीरे चल रहा है, जिससे वो अपने काम को पूरा नहीं कर पा रहें। वाई-फाई लगवाने के सवाल पर वे कहते है कि ये कंपनियां जानबूझकर नेट का स्पीड कम रखती है, जिससे उन्हें वाई-फाई वाली कंपनियों से लाभ हो सकें। जबकि वाई-फाई की भी स्पीड सहीं से काम नहीं करती, फिर भी वह किसी तरह उनके काम का निपटारा कर देती है। लेकिन टेलीकॉम कंपनियों की वजह से उनका खर्च दुगुणा हो गया, जिससे उन्हें ये समझ नहीं आ रहा कि इस अतिरिक्त खर्च का भरपाई कौन करेगा।

आपको बता दें कि इन दिनों देश में लॉकडाउन का दौर जारी है, जिसका देश की आर्थिक व्यवस्था और देश के नागरिकों के जेब पर अच्छा खासा प्रभाव पड़ा है अगर यह लॉकडाउन लगातार जारी रही तो आने वाले दिनों में उनकी हालत और भी खराब हो सकती है। क्योंकि उन्हें अपने कंपनियों पर यकीन नहीं की वो उन्हें घर बैठाकर सैलरी देगी।

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