Breaking News
  • मंदी से निपटने के लिए सरकार ने किए बड़े ऐलान, ऑटो सेक्टर को होगा उत्थान
  • तीन देशों की यात्रा के दूसरे चरण में यूएई की राजधानी आबू धाबी पहुंचे मोदी
  • देश भर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम, राष्ट्रपति कोविंद और पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं
  • 1st Test Day-2: भारत की पहली पारी 297 रनों पर सिमटी, रवींद्र जडेजा ने बनाए 58 रन

आज हुआ अंतरिक्ष में भारत का सबसे ‘भारी कारनामा’!

नई दिल्ली: वैसे तो अंतरिक्ष की दुनिया में भारत आय दिन सफलता के नए-नए झंडे गाड़ रहा है। इस क्रम में भारत ने सोमवार को एक और बड़ा और भारी कारनामा कर दिखाया है। देश ने सोमवार को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से सुबह करीब 5.28 बजे पहली बार जीएसएलवी श्रृंखला के सबसे बजनी रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 को अंतरिक्ष में भेजा है।

जीएसएलवी मार्क-3 अपने साथ 3,136 किलोग्राम वजनी संचार उपग्रह लेकर गया है, जिसे वह कक्षा में स्थापित करेगा। करीब 43.43 मीटर लंबा और 640 टन वजनी यह रॉकेट 16 मिनट में अपनी यात्रा पूरी कर लेगा और पृथ्वी की सतह से 179 किलोमीटर की ऊंचाई पर जीसैट-19 को कक्षा में स्थापित करेगा।

अमेरिका को आफत से बचाने के लिए ट्रंप की चाल!

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने बताया कि जीसैट-19 एक मल्टी-बीम उपग्रह है, संचार ट्रांसपोंडर लगे हैं। इसके अलावा इसमें भूस्थैतिक विकिरण स्पेक्ट्रोमीटर (जीआरएएसपी) भी लगा है, जो आवेशित कणों की प्रकृति का अध्ययन एवं निगरानी करेगेगा और अंतरिक्ष विकिरण के उपग्रहों और उसमें लगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन भी करेगा। इस उपग्रह की कार्य समय 10 सालों को होगा।

The PM Modi Interview: खास बातचीत में बोले नरेंद्र मोदी...

इसमें अत्याधुनिक अंतरिक्षयान प्रौद्योगिकी का भी इस्तेमाल किया गया है और यह स्वदेश निर्मित लीथियम ऑयन बैटरी से संचालित होगा। वहीं जीएसएलवी मार्क-3 त्रिस्तरीय इंजन वाला रॉकेट है। पहले स्तर का इंजन ठोस ईंधन पर काम करता है, जबकि इसमें लगे दो मोटर तरल ईंधन से चलते हैं। रॉकेट का दूसरे स्तर का इंजन तरल ईंधन से संचालित होता है, जबकि तीसरे स्तर पर लगा इंजन क्रायोजेनिक इंजन है।

Alert! अभी और बढ़ेगी प्याज की कीमत- सरकार ने लिया ऐसा फैसला

विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक के. सिवन के अनुसार "रॉकेट की भारवहन क्षमता चार टन तक है, इस रॉकेट की भविष्य की उड़ानों में भारवहन क्षमता को और बढ़ाया जाएगा।" बता दें कि इससे पहले साला 2014 में क्रायोजेनिक इंजन से रहित इसी तरह का रॉकेट प्रक्षेपित किया जा चुका है, जिसका उद्देश्य रॉकेट की संरचनागत स्थिरता और उड़ान के दौरान गतिकी का अध्ययन करना था।

loading...