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फिर टूटा भारत का सपना, अब कब चलेंगे चांद के पार!

नोएडा: भारत का चांद पर पहुंचने का सपना सच होने से महज 56 मिनट पहले टूट गया...15 जुलाई की दरम्यानी रात 2 बजकर 51 मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से चंद्रयान-2 सपनों की उड़ान भरने वाला था, लेकिन तकिनिकि खामियों के कारण भारत का सपना एक और बार अधूरा रह गया। लॉन्चिंग से ठीक 56 मिनट 24 सेकेंड पहले चंद्रयान-2 का काउंटडाउन रोक दिया गया...आइए विस्तार से बताते है भारत के लिए कितनी अहम थी यह उड़ान और इस सपने के टूटने की पूरी कहानी।

चंद्रयान-2 मिशन चंद्रयान 1 के अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिहाज से भेजा जा रहा है। नया मिशन पूराने मिशन चंद्रयान-1 के खोजे गए पानी के अणुओं के साक्ष्यों के बाद आगे चांद की सतह पर, सतह के नीचे और बाहरी वातावरण में पानी के अणुओं के वितरण की सीमा का अध्ययन करने जा रहा है। इस मिशन पर भेजे जा रहे स्पेसक्राफ्ट के तीन हिस्से हैं, जिनमें से एक ऑर्बिटर और दूसरा लैंडर जिसे भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक कहे जाने वाले विक्रम साराभाई के नाम पर विक्रम का नाम दिया गया है, जबकि तीसरा छह पहियों वाला एक रोबोट रोवर है।

इसरो द्वारा निर्मित इस रोबोट को प्रज्ञान का नाम दिया गया है, जो चांद की सतह पर भ्रमण कर जानकारियां जुटाएगा और ऑर्बिटर चांद के आसपास चक्कर लगाएगा, जबकि लैंडर चांद के दक्षिणी धुव्र के पास सुरक्षित और नियंत्रित लैंडिंग करेगा। चंद्रयान-2 को 15 जुलाई, तड़के 2.51 बजे बाहुबली रॉकेट GSLV-MK3 से लॉन्च किया जाना था लेकिन लॉन्च व्हीकल में खामी की वजह से फिलहाल मिशन रोक दिया गया है।

फिलहाल वैज्ञानिक इस बात का पता लगाने में जुटे हैं कि आखिर ये खराबी आई कैसे?  इसरो प्रवक्ता के अनुसार, मिशन रौकेट में खराबी के कारण रोका गया है, इसकी अगली तारिख जल्द ही घोषित की जाएगी। लॉन्चिंग रोकने पर भारतीय स्पेस एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि से पहले काफी भ्रम की स्थिति बनी रही, वहीं  राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग देखने के लिए श्री हरिकोटा में मौजूद थे। लेकिन अब इसरो के अधिकारी ने साफ किया है कि ‘तकनीकी खामी की वजह से लॉन्चिंग टाल दि गयी है।

आपको बता दें कि चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग पर पूरे देश की नजरें टीकी थीं और इसके सफल होने के साथ ही भारत के अंतरिक्ष अभियान के इतिहास में एक स्वर्णिम पन्ना जुड़ जाता। इस मिशन के साथ भारत चांद पर पहुंचने वाला दुनिया का चौथा देश हो जाता। भारत से पहले दुनिया के तीन देशों, जिनमें पूर्व सोवियत संघ, संयुक्त राज्य अमरीका और चीन शामिल हैं।

लेकिन भारत का मिशन चंद्रयान 2 अन्य देशों की तुलना में काफी खतरनाक है, क्योंकि चंद्रयान 2 उस जगह पर जाएगा जहां अब तक कोई देश नहीं पहुंच सका।  चंद्रयान 2 चांद के दक्षिणी धुव्र पर उतरेगा, जो खतरे से खाली नही है, इस इलाक़े से जुड़े जोखिमों के कारण कोई भी अंतरिक्ष एजेंसी वहां नहीं उतर सकी है। अधिकांश मिशन भूमध्यरेखीय क्षेत्र में गए जहां दक्षिण धुव्र की तुलना में सपाट जमीन है। जबकि दक्षिणी ध्रुव ज्वालमुखियों और उबड़-खाबड़ जमीन से भरा हुआ है। भारत के इस बहुआयामी मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत की गौरवगाथा गढ़ने के साथ ही चांद को लेकर समझ बढ़ाना और मानवता को लाभान्वित करने वाली खोज करना है। 

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