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AK-47 से भी अधिक खतरनाक होगी भारत में बनने वाली AK-203, जानिए खास बातें

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री बनने के बाद रविवार को पहली बार उत्तर प्रदेश के अमेठी पहुंचे  नरेंद्र मोदी ने जिले में कोरवा आयुध कारखाने में AK-203/103 असॉल्ट राइफल की एक निर्माण इकाई की आधारशिला रखी। जानकारी के अनुसार, AK-203 राइफल पहले से आधुनिक राइफलों में सबसे खास कहे जाने वाले AK-47 राइफल का नवीनतम व उन्नत संस्करण है।

आपको बता दें कि एके-सीरीज की राइफल्स (खास तौर पर AK 47) की सबसे महत्वपूर्ण गुणवत्ता है कि यह कभी भी जाम नहीं होता। AK 47 किसी भी स्थान पर किसी भी तरह से रखा जा सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार अगर AK 47 को रेत, मिट्टी या पानी में भी रख दिया जाए तो इससे इसकी छमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, जबकि AK-203 इसका अपग्रेडेड वर्जन बताया जाता है।

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जानकारी के अनुसार, भारत और रूस के बीच AK-203 के निर्माण के लिए फरवरी के तीसरे सप्ताह में एक अंतर-सरकारी समझौते (IGA) पर हस्ताक्षर हुआ है। जिसके बाद भारत और रूस साझे तौर पर इसका निर्मांण अमेठी के पास आयुध कारखाने में करने जा रहा है।

 

बता दें कि अमेठी के जिला मुख्यालय गौरीगंज से करीब 12 किमी. दूर कोरवा गांव में हिन्दुस्तान एअरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल की इकाई है। यहां एक बड़े कैंपस के अंदर रक्षा उत्पादों और उपकरणों को बनाने की एक फ़ैक्ट्री है, जिसका नाम है आयुध निर्माणी प्रोजेक्ट कोरवा है, जहां अब अन्य हथियारों के साथ-साथ AK-203 का भी निर्माण किया जाएगा।

AK-203 की खास खासियत

बताया जाता है कि AK-203 काफी हद तक AK-47 से मिलताजुलता हो सकता है। AK-203 की मैगजीन में 30 गोलियां हो सकती हैं। राइफल की 400 मीटर की प्रभावी सीमा होती है और इसे 100% सटीक माना जाता है। यह इंसास राइफल से हल्का और छोटा होगा। यह एक अंडरब्रिज ग्रेनेड लांचर से लैस क्या जा सकता है। इसके सभी पार्ट्स त्वरित-वियोज्य सामरिक ध्वनि सप्रेसर्स से लैस हो सकते हैं।

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AK-203 राइफल में 7.62 मिमी गोला बारूद नाटो ग्रेड है और इसलिए यह अधिक शक्तिशाली है राइफल है जो एक मिनट में 600 गोलियां चला सकती है। या एक सेकंड में 10 गोलियां दाग सकती है और इसका इस्तेमाल स्वचालित व अर्ध-स्वचालित किसी भी मोड में किया जा सकता है।

कैसे हुआ AK -47 का निर्माण

बताया जाता है कि रूस की राजधानी मॉस्को से करीब 1,200 किलोमीटर दूर यूराल पहाड़ों में उदमुर्तिया गणराज्य की राजधानी इज़ेव्स्क में मशीन, इंजीनियरिंग और मोटर प्लांट कॉम्प्लेक्स में गुप्त रूप से काम करने वाले स्टालिन के यूएसएसआर के इंजीनियरों द्वारा पहली बार एके -47 का उत्पादन किया गया था।

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