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जब चन्ने के लिए धोनी ने दिया 35 हजरा, पढ़िए रोचक किस्सा

नोएडा: महेंद्र सिंह धोनी क्रिकेट जगत का वो चमचमाता सितारा है, जिसकी चमक शायद ही कभी धूमिल हो,भारतीय क्रिकेट को नयी ऊंचाई देने वाले,क्रिकेट में बहुत से नए आयाम स्थापित करने वाले महेंद्र सिंह धोनी इंग्लैंड में आज अपना 38वां जन्मदिन मना रहे हैं। श्रीलंका के खिलाफ जीत दर्ज़ करते ही भारतीय खेमे में जश्न का माहौल शुरू हो गया, एक तरफ लीग मैचों में पॉइंट टेबल टॉप करना और दूसरी तरफ कप्तानों के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का जन्मदिन ,दोनों ही पार्टी साथ साथ शुरू हुई। इस मौके पर धोनी की पत्नी साक्षी धोनी और उनकी बेटी जीवा भी सेलिब्रेशन के लिए इंग्लैंड पहुंच गए।

बिहार और अब झारखण्ड में, 1981 में जन्में महेंद्र सिंह धोनी का जीवन बहुत संघर्षशील रहा ,एक माध्यमवर्गीय परिवार में जन्म लेने के बाद कड़ी मेहनत से धोनी ने ज़िन्दगी में हर उस ऊंचाई को छुआ जो लोगो के लिए सपना सा प्रतीत होता है ,क्लब टीम के फुटबाल गोलकीपर से ले कर क्रिकेट की दुनिया में विकेटकीपर बल्लेबाज़ बनने तक का सफर काफी कठिन रहा ,लेकिन उनकी सच्ची लगन और विश्वास ने उन्हें महेंद्र सिंह धोनी से द महेंद्र सिंह धोनी बना दिया।

 भारत के सबसे सफल कप्तान और विकेटकीपर बनने का श्रेय भी उन्ही के पास है,ICC कंडक्ट तीनो ही ट्रॉफी भारत को दिलाने वाले धोनी विश्व के एक मात्र कप्तान है ,पहले टी ट्वेंटी ,फिर 50 ओवर में चैंपियन ,उसके बाद चैम्पियंस ट्रॉफी ये तीनो ही धोनी की कप्तानी में भारत आयी। सात तारीख ,सातवे महीने में 7 नंबर की ही जर्सी पहहने वाले माही ने इंडियन क्रिकेट को वो सब दिया जिसकी भारतीय क्रिकेट को वर्षो से तलाश थी।आईये उनके जन्म दिन पर जानते है रांची में चने के ठेले से लेकर कैसे बने सबसे सफलतम कप्तान आखिर क्या है धोनी का चना प्रेम।

झारखंड का रांची शहर का वो कॉलेज ग्राउंड जहां से माही के क्रिकेट करियर की शुरुवात हुई ,यही से माही ने हेलीकाप्टर शॉट की शुरुवात की ,आसपास के फ्लैट्स में सीधे सिक्स मार के बाल पंहुचा देते थे माही,वही कॉलेज ग्राउंड के पास एक चने का ठेला लगाने वाले शक्स है महेंद्र जी ,इत्तफाक से इनका नाम भी महेंद्र है।

30 साल से ज्यादा हो गए उनको ठेला लगाते हुए ,कॉलेज ग्राउंड के आस पास ही घूमते रहते है ,महेंद्र जी बताते है की एक बार जब माही पाकिस्तान से जीत के आया था तो उसके बाद प्रैक्टिस करने कॉलेज ग्राउंड आये ,उनके साथ उनके बेस्ट फ्रेंड संतोष लाल भी थे जिन्होंने धोनी को हेलीकॉप्टर शॉट मारना सिखाया था ,प्रैक्टिस खत्म होने के बाद धोनी महेंद्र जी के ठेले पर चने खाने आये ,तो वह न्यूज़ पेपर में छप गया की धोनी बिना पैसे दिए ही चने खा के चले गए ,ऑस्ट्रेलिया से जीतने के बाद माही फिर रांची आये तो एक बार फिर से महेन्द्रजी के ठेले पर आये और चने खाने के बाद उनको कुछ पैसे देने लगे तो उन्होंने पैसे लेने से इंकार कर दिया ,लेकिन माहि फिर भी पैसे रख कर चले गए ,माही के प्रोटोकॉल में लगे पुलिसकर्मियों ने जब वो पैसे गिने तो पुरे 35 हज़ार निकले।

टीम इंडिया अब विश्व कप के सेमीफइनल में पहुंच गयी है और अब कप सिर्फ दो कदम की दूरी पर है। ऐसे में महेंन्द्रजी का कहना है की "धौनी सुन लो, जीत के आना, हम चना खिलाएंगे।'' हालांकि महेंद्र जी अकेले ऐसे नहीं जो विश्व कप में भारत की जीत चाहते हैं, बल्कि पूरा भारत यही चाहता है कि टीम इंडिया विश्व कप जीते और अपना अंतिम विश्वकप खेल रहे माही को वो ट्रॉफी दे जो उन्होंने 2011 में भारत को दी थी। महेंद्र सिंह धोनी ने रांची को विश्व विख्यात कर दिया और रांची में युवाओ के बीच क्रिकेट का क्रेज  और ज्यादा बढ़ा दिया।

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