Breaking News
  • सोनभद्र जाने पर अड़ी प्रियंका गांधी, धरने का दूसरा दिन
  • असम और बिहार में बाढ़ से 150 लोगों की गई जान, 1 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित
  • इलाहाबाद हाइकोर्ट ने पीएम मोदी को जारी किया नोटिस, 21 अगस्त को सुनवाई
  • कर्नाटक पर फैसले के लिए अब सोमवार का इंतजार

मिडिल क्रम पर टिका है भारत का विश्वकप, जानिए कैस

नोएडा : विश्व कप 2019 में भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए मैच में टीम इंडिया को पहली मैच में हार का सामना करना पड़ा, विश्व कप की प्रबल दावेदार मानी जा रही इंग्लैंड ने भारत के विजयरथ को रोक दिया ,इस मैच में हार के साथ ही भारत के मध्यक्रम पर भी सवाल उठना शुरू हो गए है खासकर महेंद्र सिंह धोनी और केदार जाधव पर। पिछले कुछ मैचों में पूर्व भारतीय कप्तान जिस लय में खेलते नज़र आये, वो इस मैच में नज़र नहीं आ सके। केदार जाधव भी जिस खेल के लिए जाने जाते है वो भी वो खेल नहीं खेल सकें।

इंग्लैंड से मिली हार का वैसे तो भारत पर कोई विशेष फर्क नहीं पड़ा है लेकिन आगे आने वाले मैचों में मध्यक्रम का इस तरीके से मैच दर मैच निराश करना भारतीय टीम के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। महेंद्र सिंह धोनी लक्ष्य का पीछा करते हुए इस बार वो कमाल नहीं दिखा पाए है जैसा की वो अक्सर दिखाते आये है। केदार जाधव को बॉलिंग का अवसर तो नहीं प्राप्त हुआ लेकिन बल्ले से जब भी मौका मिला तो उनका बल्ला खामोश ही रहा, ऐसे में आगे आने वाले मैचों के लिए टीम में उनकी जगह भी खतरे में आ गयी है। ऐसे में विकल्प के तौर पर रविंद्र जडेजा का नाम सामने आ रहा है, जडेजा इस विश्व कप में कई बार वैकल्पिक तौर पर क्षेत्ररक्षण करते नज़र आये और बेहतरीन चार कैच भी लिए।

क्रिकेट प्रशंसकों के साथ क्रिकेट दुनिया के दिग्गजों ने भी धोनी और केदार जाधव की धीमी पारी की काफी आलोचना की है। इंग्लैंड ने पहले खेलते हुए 338  रनों का पहाड़ सा स्कोर भारत के सामने रखा। जिसके सामने भारत की शुरुआत कुछ खास नही रहीं। केएल राहुल बिना खाता खोले ही पवैलियन लौट गए। रोहित और विराट ने काफी हद तक पारी को संभाला और रोहित ने शानदार शतक लगा के टीम को एक सम्मानजनक स्थिति में पहुंचाया। उसके बाद की जिम्मेदारी थी भारत के मध्यक्रम की लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ भारत का मध्यक्रम बौना नज़र आया। ऐसा लगा ही नहीं की मिडिल आर्डर जीतने के लिए खेल रहा हो।

ऋषभ पंत जैसे धाकड़ बल्लेबाज का भी आगाज़ विश्व कप की बर्मिंघम जैसे बैटिंग पिच पर हुआ लेकिन उनका बल्ला भी ज्यादा कुछ खास नहीं कर पाया। उसके बाद महेंद्र सिंह धोनी और केदार जाधव की धीमी बल्लेबाज़ी ने भारत को बैकफुट पर ला दिया। एक समय पांच ओवर में 71 रन की जरुरत थी और पांच ही विकेट भारत के हाथ में थे, लेकिन टीम इंडिया के मध्यक्रम ने जीतने का प्रयास ही नहीं किया। अंतिम 30 गेंद में सिर्फ 40 ही रन बने और टीम को 31 रनो से मुँह की खानी  पड़ी। मध्यक्रम के लचर प्रदर्शन को देखते हुए क्रिकेट एक्सपर्ट के कमेंट्स भी सोसाइल मीडिया पे छाएं रहें।

इस पर क्रिकेट कमेंटेटर व एक्सपर्ट हर्षा भोगले ने निराशा जाहिर की। उन्होंने लिखा, 'निराशाजनक अंत। एक गेंद पर एक रन वाली पार्टनरशिप से मैच नहीं जीते जाते। रोमांच बस तबतक था जब तक हार्दिक क्रीज़ पर थे।'  पूर्व टेस्ट क्रिकेटर संजय मांजरेकर को भी धोनी का आखिरी ओवर्स में सिंगल लेना पंसद नहीं आया। उन्होंने लिखा, 'अगर कोई टीम भारत को जीतने से रोक सकती थी, वह इंग्लैंड ही थीं। आखिरी ओवर्स में धोनी का खेलने का तरीका बड़ा चौंकानेवाला था।'  क्रिकेट फैंस ने भी भारत की इस रणनीति को विफल बताते हुए धोनी और जाधव को काफी ट्रोल किया, खैर ये टीम के लिए एक चेतावनी मात्र थी। अगर टीम इंडिया विश्व कप जीतने का सपना संजोये बैठी है तो उसको अपने मिडिल आर्डर की विफलता से बाहर निकलकर एक परिपक्व खेल का उदहारण देते हुए खेल को अंत तक ले के जाना होगा और बाकि बचे मैचों में जीत दर्ज़ करनी होगी।

loading...