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धोनी के ग्लव्स पर भिड़े फैंस, ICC ने दिया हटाने का फरमान

नई दिल्ली : साउथ अफ्रीका और इंडिया के बीच खेले गये मैच में धोनी के द्वारा किये गये ग्लव्स के इस्तेमाल का विवाद अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। यह विवाद अब क्रिकेट ग्राउंड से बाहर निकलकर देशभक्ति के जज्बा तक पहुंच गया है। आपको बता दें कि साउथ अफ्रीका और इंडिया के बीच छिड़े मैच में, जो धोनी का पहला मैच था। जिसमें धोनी ने पैरा मिलिट्री फोर्स के बलिदान बैज के निशान का इस्तेमाल किया था। जिसके बाद ICC ने इस ग्लव्स को हटाने का फरमान जारी किया है।

ICC के इस निर्णय से क्रिकेट फैंस नाखुश दिखें। और उन्होंने ICC के इस निर्णय का विरोध करते हुए कई ट्वीट कर डालें । सोशल मीडिया पर तर्क दिया जा रहा है कि जब मैच से पहले खिलाड़ी मैदान में नमाज पढ़ सकते हैं, तो फिर ग्लव्स में क्या गलत है। क्योंकि धोनी को प्रादेशिक सेना में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल का दर्जा मिला हुआ हैं। ऐसे में उनके पास आधिकारिक तौर पर ये हक है कि वे इस बैज का इस्तेमाल कर सकें। इसलिए धोनी ने सम्मान दिखाते हुए अपने विकेटकीपिंग ग्लव्स पर बलिदान मेडल का निशान लगाया। जब फैंस को इस बात का पता चला तो वे धोनी का गुणगान करने लगे।

सोशल मीडिया पर कुछ लोग पाकिस्तानी टीम का तस्वीर साझा करते हुए ICC से यह सवाल कर रहें है कि जब मैदान पर नमाज़ पढ़ा जा सकता है तो धोनी ग्लव्स क्यों नहीं पहन सकते। सिर्फ ग्लव्स पर बैज लगाने से क्या दिक्कत है। जबकि धोनी खुद लेफ्टिनेंट कर्नल हैं। गौरतलब है कि इससे पहले भी अफगानिस्तान टीम की एक नमाज पढ़ते हुए तस्वीर वायरल हुई थी। जिसपर काफी विवाद हुआ था। उस समय इंजमाम उल हक अफगानिस्तान टीम के कोच थे।

 

नमाज़ वाली इस बात पर सिर्फ फैंस ही नहीं, बल्कि बड़ी हस्तियां भी सवाल उठा रही हैं, पाकिस्तान के ही तारिक फतेह ने भी इस पर आपत्ति दर्ज कराई है। वहीं भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया का भी कहना है कि धोनी के इस तरह के बैज का इस्तेमाल करने में कोई गलती नहीं है, लेकिन अगर ICC के नियम हैं तो उसे भी देखना होगा।

भारतीय ओलंपियन सुशील कुमार ने भी कहा कि जबतक किसी ने कोई शिकायत नहीं की होगी तबतक ये मामला सामने नहीं आया होगा। पाकिस्तान के मंत्री भी इस मुद्दे को उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए लेकिन नियमों को भी देखना होगा।

 

अगर हम ICC नियम की बात करें तो, ICC का नियम कहता है कि कोई भी खिलाड़ी अपनी ड्रेस पर ऐसा कुछ नहीं इस्तेमाल कर सकता, जिससे कोई धार्मिक, राजनीतिक या नस्लीय संदेश जाए या फिर किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे। हालांकि, एक तर्क ये भी दिया जा रहा है कि आर्मी के बैज से किसी को क्या ठेस पहुंच सकता है।

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