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CM ने RSS को क्यो बताया आतंकी संगठन- जारी है घमासान...

नई दिल्ली: पिछले काफी दिनों तक राजनीति कोलाहल के बीत केंद्र की सत्ताधारी बीजेपी ने गुजरात में अपनी 22 साल पुरानी सत्ता बचा ली, तो वहीं कांग्रेस शासित राज्य हिमाचल की सत्ता भी बीजेपी ने जीत ली, जिसके बाद अब कर्नाकट विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक हंगामा जारी है।

इस क्रम में कर्नाटक दौरे पर गए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कर्नाकट की कांग्रेस सरकरा के मुख्यमंत्री पर सिद्धारमैया पर सीधा हमला किया। तो वहीं बीजेपी पर हमला करते हुए बुधवार को सिद्धारमैया ने कहा कि NIA लगातार पीएफआई को निशाना बना रही है, उनके 5 लोगों पर चार्जशीट भी दायर की गई है।

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सीएम ने कहा कि क्या सरकार पीएफआई को बैन करने जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो आरएसएस और बजरंग दल भी आतंकवादी हैं, कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा कि जो भी कानून का उल्लंघन करेगा उसे बख्शा नहीं जाएगा। चाहे वो आरएसएस हो, वीएचपी हो या फिर बजरंग दल हो।

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सिद्धारमैया के हमले के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच आक्रामक लड़ाई जा रही है। इस क्रम में कर्नाटक बीजेपी ने ट्विटर के हवाले से कहा कि सिद्धारमैया चुनाव का ध्रुवीकरण कर रहे हैं। बीजेपी के अनुसार एक तरफ वो बीजेपी-आरएसएस को आतंकी संगठन कह रहे हैं दूसरी तरफ स्थानीय कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश बीजेपी पर बैन करने की मांग कर रहे हैं।

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कांग्रेस पर हमला करते हुए बीजेपी ने कहा कि उन्हें समझना चाहिए कि ये 1975 नहीं है और आज इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री नहीं हैं। तो वहीं RSS प्रचारक राकेश सिन्हा ने एक टीवी शो के दौरान कहा कि चुनाव के बाद सिद्धारमैया के हाथ से सत्ता जा रही है, जिसे बचाने कते लिए वह ओछी राजनीत कर रहे हैं, और आतंकियों का सहारा ले रहे हैं।

क्या है पीएफआई

इस संगठन की पहचान कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन के तौर पर रही है, जिसके साथ कई तरह के विवाद जुड़े हैं। जबकि पीएफआई खुद को एक गैर सरकारी संगठन बताता है। इस संगठन पर कई गैर-कानून गतिविधियों में शामिल रहने का आरोप है। पिछले दिनों गृह मंत्रालय ने भी कहा था कि इस संगठन के लोगों के संबंध जिहादी आतंकियों के साथ हैं, साथ ही इस पर इस्लामिक कट्टरवाद को बढ़ावा देने का भी आरोप है, लेकिन पीएफआई ने खुद पर लगे इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बता है, हालांकि इसके खिलाफ एनआईए की जांच जारी है।

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