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सरकार के नशा मुक्त पंजाब में 'पुलिस' ही बन गयी रोड़ा?

चंडीगढ़: पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार अब नशे खिलाफ जीरो टॉलेरेंस नीति अपना रही है। जिसके चलते अब नशा तस्करों के साथस अथ उनका साथ देने वाले लोगों पर भी शिंकजा कसा जा रहा है। पंजाब में हाल ही में डीजीपी ने पुलिस को दिशा निर्देश दिया था कि, उनके क्षेत्र में अगर नशीली पदार्थों की तस्करी होती है तो उसके लिखे वह खुद जिम्मेदार होंगे।

बतादें कि राज्य को नशा मुक्त बनाने के प्रयास को कुछ अंदर के ही लोग फेल करने में लगे हुए है. ऐसे में पुलिस विभा ग ने ऐसे ही कुछ लोगों पर गाज गिराई है. विभाग ने राज्य के कई क्षेत्रों में पुलिस अधिकारियों को न सिर्फ सस्पेंड किया है बल्कि उनके खिलाफ विभागीय नोटिस भी जारी हुआ है। सरकार ने नशा तस्करी पर रोक लगाने की मुहीम को यह पुलिस अधिकारी कमजोर रह थे और उनके सामने ही धडल्ले से नशे के पदार्थों की तस्करी होती थी! जिसके कारण पंजाब पुलिस ने 5 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है।

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आईजी बार्डर रेंज एसपीएस परमार इसकी जानकारी दती हुए कहा कि बलकलां, जंडियाला, नवापिंड, तानहगढ़ तथा बटाला के चौकी इंचार्ज को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके साथ ही 3 थानों के एसएचओ को नशा तस्करों के खिलाफ ठिलाई बरतने के आरोप में नोटिस जारी किया गया है। साथ ही अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने को कहा गया है। इससे पहले पंजाब के पुलिस महानिदेशक सुरेश अरोड़ा ने राज्य में ड्रग्स समेत कई मादक पदार्थों की तस्करी के लिए अब सीधा स्थानीय प्रशासन पर जिम्मेदारी डाल दी थी।

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हाल ही में डीजीपी अरोरा ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा था कि, जिस इलाके में भी नशा तस्करी की गतिविधियां सामने आएंगी, उसके लिए संबंधित क्षेत्र के फील्ड अफसर जवाबदेह होंगे। राज्य में कानून व्यवस्था के साथ साथ नशीले पदार्शों की तस्करी भी बड़ा मुद्दा बन हुआ है। राज्य को नशे के कारोबार ने ऐसा घेर रखा है कि अब चुनाव में भी यह प्रमुख मुद्दा बन रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी राज्य को नशा मुक्त बनाने की बात कहकर सत्ता में आई थी। लेकिन उसकी कोशिशें नाकाम हो रहीं हैं। क्योंकि यहाँ नशे का सामान तस्करी करवाने में अंदर के ही लोग शामिल रहते हैं।

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