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पृथ्वी पर मन भर गया तो यहां भी रह सकते हैं- वैज्ञानिकों ने कहा...

नई दिल्ली: पृथ्वी के अलावा भी कई ऐसे ग्रहों की खोज हो चुकी है, जिस पर वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि वहां भी जीवन संभव है। इसी कड़ी में आगे बढ़ते हुए भारतीय मूल के अनुसंधानकर्ता के नेतृत्व में सबसे बड़े उपग्रह टाइटन के ऊपरी वायुमंडल में जीवन से जुड़े एक महत्वपूर्ण कारक की खोज की है।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन यानी की यूसीएल के वैज्ञानिकों ने कैसिनी मिशन के आंकड़ों की मदद से टाइटन के वायुमंडल में ऋणात्मक आवेश वाले अणुओं कार्बन चेन एनायन्स की पहचान की है।

जिसको लेकर ऐसा माना जाता है कि इन रैखिक अणुओं की भूमिका अधिक जटिल अणुओं के निर्माण में होती है और संभवत: यह पृथ्वी पर जीवन के आरंभिक स्वरूपों के लिए आधार के तौर पर काम कर चुका है। शोधकर्ताओं के हवाले से दावा किया जा रहा है कि ऋणात्मक आवेश वाले कार्बन श्रृंखला के ऋणायनों की खोज आश्चर्यजनक है।

क्योंकि यह बेहद क्रियाशील होते हैं और अन्य पदार्थों के साथ संयोजन स्थापित करने से पहले वे टाइटन के वायुमंडल में इतने लंबे समय तक अपने मूल स्वरूप में नहीं रह सकता है। इस तरह अब इस उपग्रह के वायुमंडल को लेकर मौजूदा समझ पूर्ण रूप से बदल रही है।

बताया जाता है कि आंकड़ों के आधार पर ऐसी जानकारियां भी मिली है कि यह कार्बन श्रृंखलाएं उस उपग्रह के नजदीक आने पर टूटने लगती हैं, जबकि वृहद आकार वाले ऐरोसोल अणुओं के पूर्ववर्तियों में तीव्र गति से वृद्धि होती है। जोकि दोनों के बीच करीबी संबंध होने की ओर इशारा करता है, जिसमें कार्बन श्रृंखलाएं बड़े अणु बनाती हैं, जो सतह गिरने के बाद संभवत: जम जाते हैं।

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