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जिन्न के रगो में था गुजराती खून- 40 साल के उम्र में दोस्त की 16 साल की बेटी के साथ...

आज 14 अगस्त 2017 को पाकिस्तान अपना 70वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, ऐसे में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की चर्चा न हो ऐसा संभव ही नहीं है, क्योंकि जिन्ना को पाकिस्तान के “गांधी” के नाम से जाना जाता है। दरअसल जिन्ना के जन्म को लेकर विरोधाभास बना हुआ है।

सरोजिनी नायडू द्वारा जिन्ना की जीवनी पर लिखी गई किताब के अनुसार उनका जन्म 25 दिसंबर 1876 को हुआ था, जबकि कुछ अन्य का कहना है कि जिन्ना का जन्म 20 अक्टूबर 1876 को हुआ कराची में हुआ था। हालांकि विवदों के बाद भी 25 दिसंबर 1876 को को ही जिन्ना का जन्मदिन मनाया जाता है।

जिन्ना ने मुंबई की युनिवर्सिटी से मैट्रिक की और महज 19 साल की उम्र में ही वकील बन गए थे। कहा जाता है कि जिन्ना का दिमाग बचपन से ही बहुत तेज था, जिन्ना को लेकर कहा जाता है कि साल 1905 में जब बाल गंगाधर तिलक राजद्रोह का केस का सामना कर रहे थे, तब उन्होंने जिन्ना को ही अपना वकील बनाया था।

हालांकि  जिन्ना इस केस को जीत नहीं सके थे और तिलक को सश्रम कारावास की सजा दे दी गई थी। बताया जाता है कि जिन्ना मूल रूप से गुजराती थे, उनके पिता जिन्नाभाई पुंजा का जन्म गुजरात, कठियावाड के पनेली गांव में हुआ था। पुंजा एक प्रसिद्ध व्यापारी थे और जिन्ना के जन्म से पहले सिंध जो अब पाकिस्तान में है वहां जाकर बस गए थे।

पाकिस्तान की स्थापना के बाद जिन्ना पाकिस्तान के पहले गर्वनर जनरल बने। इसके बाद टीवी की बीमारी से जूझ रहे जिन्ना ने कराची में 11 सितंबर 1948 को रात करीब 10:30 बजे दुनिया को अलविदा कर दिया।

पाकिस्तान के कराची शहर में 25 दिसंबर 1876 को जन्मे जिन्ना की मात्र 14 वर्ष की उम्र में ही एमीबाई नामक लड़की से शादी हो गई थी। 17 साल की उम्र में 17 बैरिस्टर की पढ़ाई के लिए लंदन चले गए थे, इसके बाद जब वह 1986 में मुंबई लौटते इससे पहले ही एमीबाई का निधन हो गया था।

बताया जा जाता है कि बैरिस्टर के तौर पर जिन्ना अपने शाम का समय मुंबई के ‘ओरिएंटल क्लब’ में बिताया करते करता था। बिलियर्ड और चैस के शौकीन जिन्ना की क्लब में आने वाले अनेक लोगों से दोस्ती थी। इसमें मुंबई के नामी उद्योगपति सर दिनशा पिटीट का नाम भी शामिल था।

कहा जाचा है कि जिन्ना अक्सर दिनशा के बंगले में आयोजित होने वाली पार्टियों में भी शामिल हुआ करते थे। कभी-कभी तो वे बंगले पर दिनशा के साथ शतरंज खेलते हुए भी दिखे थे, जिन्ना और दिनशा के बीच काफी अच्छी दोस्ती थी।

इसी दौरान जिन्ना की नजर दिनशा की 16 साल की बेटी रूटी पर पड़ी और उन्हें रूटी से प्यार हो गया। इसी बीच एक बार दिनशा ने मुंबई की गर्मी से राहत पाने के लिए दार्जिलिंग में छुट्टियां बिताने का प्रोग्राम बनाया। दिनशा ने जिन्ना को भी आमंत्रित किया और फिर दिनशा के परिवार के साथ जिन्ना भी दार्जिलिंग जा पहुंचे।

तब 1916 का दौर चल रहा था, दार्जिलिंग में ही जिन्ना की मुलाकात दिनशा की 16 वर्षीय बेटी रतनबाई उर्फ रूटी से हुई। हालांकि रूटी, जिन्ना को इससे पहले भी कई बार देख चुकी थीं, इस बार की मुलाकात कुछ खास रही,इस दौरान रूटी बेहद ही खुबसुरत लग रही थी, और इसी दौरान से जिन्ना और रूटी के बीच प्यार हुआ था।

कहा जाता है कि इस दौरान रूटी नहज 16 साल की थी, जबकि जिन्ना उनसे 24 साल बड़े थे, लेकिन इसके बाद भी दोनों का प्यार आगे बढ़ने लगा, इसी दौरान  जिन्ना ने दिनशा से उनकी बेटी रूटी का हाथ मांग लिया। लेकिन दिनशा ने साफ इनकार कर दिया।

इसके बाद से ही जिन्ना और दिनशा की दोस्ती का भी अंत हो गया। जिन्ना ‘पारसी मैरेज एक्ट’ के तहत भी रूटी से शादी नहीं कर सकते थे, क्योंकि रूटी की उम्र तब बहुत कम थी।

 

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