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‘आस्था में अंधी’ महिलाओं के आड़ में खजाना भरने वाले- भगवान से क्यो नहीं डरते?

नई दिल्ली: भारतीय नारी अपने बालों का काफी ध्यान रखती हैं, वे अपनी इन बालों को खुबसूरत बनाने के लिए न जाने कितने जतन करती है और खुबसूरत बालों का विषेश महत्व भी होता है। यही वजह है कि फिल्मों के गानों और गज़लों में इस घनी जुल्फों का जिक्र किया जाता है। तो वहीं दक्षिण भारत में महिलाओं के इस सुन्दर बालों को कटवाने की एक परंपरा भी है। यहां की महिलाएं आस्था के दौरान अपने बालों का कई मंदिरों में मुंडन कराती है।

दरअसल दक्षिण भारत में महिलाएं अपने बालों को कटवाकर मंदिरो में अर्पित करती है। यहां महिलाओं का सिर मुड़वाना अशुभ नहीं माना जाता है, बल्कि अपनी मनोकामना को पूर्ण करने के लिए अपने बालों का दान देती है। अब आप सोच रहे होंगे कि इन बालों का होता क्या होगा ?  क्या ये बाल ऐसे ही कुड़े में डाल दिए जाते हैं या फिर भगवान इसे धारण करते हैं, तो ये दोनों बात गल है, क्योंकि इसका फल किसी और को मिलता है।

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बताया जाता है कि इन बालों का व्यापार बड़े पैमाने पर होता है और इनसे लाखों की कमाई होती है। पश्चिम देशो में इन बालों की काफी अधिक मांग है। खबरों के अनुसार, दक्षिण भारत में कई मंदिरों में बाल मुड़वाने वाली अधिकतर महिलाए आस्था के वजह से ऐसा करती है, ताकि उनकी मनोकामना पूरी हो सकें। वैसे इससे पहले इन औरतों ने कभी भी बाल नहीं कटवायें होते हैं। जिसकी वजह से इनके बाल काफी लम्बे व सीधे रहते है और ऐसे ही बालों की मांग भी ज्यादा होती है।

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और तो और ये अपने बालों में ना कलर करवाती है और न ही ज्यादा शैम्पू का प्रयोग करती हैं। दक्षिण महिलाओं के बाल टूटे हुए या डमेज भी कम ही होते हैं, जिसके कारण इनके बालों की मांग काफी अधिक होती है।

इन बालों का होता है

बताया जाता है कि इन बालों को काफी अच्छी कीमत में अंतराष्ट्रीय बाजार में बेचा जाता है। इन बालों के प्रयोग ज्यादातर ब्यूटी पार्लर में वीग बनाने के लिए किया जाता है और कई ऐसे प्रोडक्ट्स में जिनमें इन बालों का प्रयोग किया जाता है। खब़रों के अनुसार, मंदिर में बालों से कमाये गये पैसो को उपयोग जनकल्याण के कामों में किया जाता है। लेकिन इन पैसों का हिसाब-किताब भगवान भरोसे ही रहता है।

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तो वहीं कई मामले में ऐसे भी आ चुके हैं, जिनमें बालों का अवैध कारोबार भी किए जाते रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लोग गरीब हमिलाओं को बहला कर आस्था के जाल में फांसते हैं और फिर उनका बाल दान करवा कर अपना खजाना भरते रहे हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि महिलाओं को बालों के कारोबारी के बारे में कुछ पता ही नहीं होता, लेकिन ‘आस्था में अंधी’ हो चुकी महिलाओं को अब ये बात कैन बताए, ऐसे में यहां भी सब भगवान भरोसे ही चल रहा है।

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