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आखिर क्यों बांधी जाती है भाई के हाथ पर राखी...क्या है इसके पीछे का महत्व और कारण

Noida : रक्षा बंधन का त्योहार भाई-बहनों के लिए बहुत खास होता हैं, इस दिन बहनें अपने भाई के हाथ पर रक्षासूत्र बांध कर अपने भाई से अजीवन रक्षा का वचन लेती हैं।  और साथ ही अपने भाई को लंबी उम्र का आर्शिवाद और जीवन में अच्छी सफलता की कामना देती हैं । भाई बहन का रिश्ता सबसे पवित्र और सबसे प्यारा होता हैं । पौराणिक कथाओं में भी इस दिन को बहुत खास दिन माना जाता हैं रक्षा बंधन के अवसर पर कुछ पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं, जिसे आपने कभी सुना नही होगा । ऐसी ही एक पौराणिक एतिहासिक कथा हैं । जब बहन ने अपनी रक्षा के लिए भाई को पुकारा और भाई बहन की रक्षा के लिए दौड़ा चला आया, तो हम आपको ऐसी दो पौराणिक कहानियां बताते हैं जिसमें भाई बहन के रिश्ते को बखुबी देखा जा सकता हैं।

मध्यकालीन युग में राजपूत और मुस्लिमों के बीच संघर्ष चल रहा था। रानी कर्णावती चितौड़ के राजा की विधवा थीं। रानी कर्णावती, बहादुरशाह से युद्ध कर पाने में असमर्थ थी। जब कर्णावती को कोई रास्ता नही मिला तो उन्होने हुमायूं को राखी भेजी और अपनी रक्षा के लिए पुकारा । रानी की भेजी राखी की लाज रखते हुए हुमायूं ने बहादुशाह से लडाई करने के लिए आगे कदम बढ़ाया और कर्णावती के साथ-साथ उसके राज्य की भी रक्षा की ।

यें तो थी रानी कर्णावती और हुमायूं की कहानी जिसमें भाई अपने वचन को निभाने के लिए अपनी जान जोखिम में ड़ालकर अपनी बहन की रक्षा करने पहुंच जाता हैं । वही एक कहानी ऐसी भी हैं, जिसे आप सबने सुना होगा ये कहानी भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी की हैं । जहां एक बार फिर बहन के पुकारने पर भाई उसकी रक्षा करने पहुंच जाता हैं ।

रक्षाबंधन से जुड़ा एक प्रसंग महाभारत में भी आता है । महाभारत में कृष्ण ने शिशुपाल का वध अपने चक्र से किया था । शिशुपाल का सिर काटने के बाद जब चक्र वापस कृष्ण के पास आया तो उस समय कृष्ण की उंगली कट गई भगवान कृष्ण की उंगली से रक्त बहने लगा। यह देखकर द्रौपदी ने अपनी साडी़ का किनारा फाड़ कर कृष्ण की उंगली में बांधा था, जिसको लेकर कृष्ण ने उसकी रक्षा करने का वचन दिया था। इसी ऋण को चुकाने के लिए दु:शासन द्वारा चीरहरण करते समय कृष्ण ने द्रौपदी की लाज रखी। तब से ‘रक्षाबंधन’ का पर्व भी बहनों के लिए खास दिन माना जाने लग गया था ।

अगर रक्षा बंधन के शुभ समय की बात करे तो आपको जान कर खुशी होगी की हर साल की तरह इस साल रक्षा बंधन के शुभ मौके पर भद्रा दोष नही  लगेगा । इस साल राखी बांधने का शुभ समय सुबह  5 बजकर 45 मिनट पर शुरू होगा और  शाम 6 बजकर 1 मिनट तक रहेगा ।  

कहा जाता है कि भद्रा में बहनें भाइयों को राखी नहीं बांधती हैं । पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रावण की बहन शूर्पणखा ने भद्रा के समय में अपने भी को रक्षा सूत्र बांधा था, जिससे रावण का सर्वनाश हो गया था । तभी से पौराणिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए बहने अपने भाईओं के भद्रा दोश में राखी नही बांधती ।

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