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असम एनआरसी: इन लोगों को मिलेगा दूसरा मौका

नई दिल्ली: असम में एनआरसी ड्राफ्ट का मामला एक बार फिर से चर्चा में हैं। पिछले दिनों आखिरी ड्राफ्ट जारी किए जाने के बाद कई लोगों केस नाम नहीं थे, जिसके कारण सरकार विरोधी दलों ने सरकार पर आक्रमक हमले किए थे। जिसके बाद हालिया चर्चा तब हो रही है जब सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ड्राफ्ट से बाहर रह गए व्यक्तियों के दावे और शिकयतों को स्वीकार करने का काम शुरू किए करने का आदेश दिया है।

मामले को लेकर जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस आर. एफ. नरिमन की पीठ ने कहा कि एनआरसी के मसौदे से बाहर रह गए करीब 40 लाख लोगों के दावे और शिकायतों को प्राप्त करने की प्रक्रिया 25 सितंबर से शुरू होगी और यह प्रक्रिया अगले 60 दिन तक जारी रहेगी। कोर्ट ने कहा कि व्यवस्था इतनी मजबूत होनी चाहिए कि विरोध को भी झेल सके।

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कोर्ट ने कहा कि हम लिबर्टी की हत्या नहीं कर सकते, हम इस पर पैनी नजर रखे हुए हैं। कोर्ट ने कहा कि, जुलाई में जारी की गई एनआरसी के मसौदे में शामिल करने के दावे और शिकयतों पर की प्रक्रिया पर जोर देने की जरूरत है। इस मसले के परिमाण को देखते हुए ही नागिरकों को दूसरा मौका दिया जा रहा है।

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कोर्ट के निर्देशानुसार, असम में एनआरसी का पहला मसौदा 31 दिसंबर और एक जनवरी की मध्य रात्री को प्रकाशित किया या था। इस दौरान 3.29 करोड़ आवेदकों में से 1.9 करोड़ लोगों का नाम शामिल किए गया था। दावा किया जाता है कि असम में 20वीं सदी से ही बांग्लादेशी घुसपैठ कर रहे हैं। जानकारी के लए बता दें कि असम एक मात्र ऐसा राज्य है जिसके पास एनआरसी है और पहली बार इसे 1951 में तैयार किया गया था।

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